
Iran-US Conflict: मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध और गहरी हो गई है। दक्षिणी ईरान के रणनीतिक इलाकों में एक के बाद एक कई जोरदार धमाकों की खबर है, जिसने पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं। सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि इस ताजा हवाई हमले की जद में ईरान का एकमात्र चालू नागरिक परमाणु ऊर्जा संयंत्र यानी 'बुशहर न्यूक्लियर फैसिलिटी' भी आ गया है। स्थानीय मीडिया और ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, बुशहर प्लांट के बेहद नजदीकी सुरक्षा घेरे (पेरिमीटर) के साथ-साथ चोगादक सैन्य अड्डे और तटीय इलाकों को निशाना बनाया गया है।
हालांकि एक अमेरिकी अधिकारी ने 'अल जजीरा' को बताया कि ईरान पर हाल के हमलों के पीछे उनकी सेना का हाथ नहीं था। वे तेहरान के साथ बातचीत के लिए प्रतिबद्ध हैं। दूसरी तरफ से पूर्व अमेरिकी मरीन कॉर्प्स अधिकारी डैन ग्रेजियर का कहना है कि पूरी संभावना है कि इसके पीछे इजराइल का हाथ हो सकता है।
वहीं एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, 'ट्रंप प्रशासन अभी भी समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध है। परमाणु समझौते तक पहुंचने के लिए तकनीकी स्तर की बातचीत जारी है।'
ईरान में हाल ही में हुए हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्थानीय समयानुसार गुरुवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी कदमों के बारे में जानकारी दी। इजराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर सोशल मीडिया एक्स पर शेयर की गई पोस्ट में कहा गया, 'आज शाम दोनों नेताओं के बीच एक और बातचीत हुई, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच लगातार तालमेल बनाए रखने पर सहमति बनी।'
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव को लेकर एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने के प्रयास किए गए हैं। इसके लिए कतर, पाकिस्तान और क्षेत्र के अन्य मध्यस्थों की तरफ से ईरान और अमेरिका के बीच कई फोन कॉल किए गए हैं।
वहीं इसको लेकर सूत्रों के हवाले से 'एक्सियोस' को बताया है कि दोनों पक्षों के साथ तनाव कम करने पर सहमति बनाने और फिर तकनीकी टीमों के बीच बातचीत के अगले दौर के लिए तारीख तय करने के लिए बड़े पैमाने पर कूटनीतिक कोशिशें की जा रही हैं।