
75 की उम्र से पहले हर 10 में से 1 भारतीय को कैंसर होने का खतरा (Representational Photo)
भारत (India) में कैंसर (Cancer) तेजी से बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और उसकी सहयोगी संस्था इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आइएआरसी) की ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन कैंसर 2026 के अनुसार भारत में 75 साल की उम्र से पहले हर 10 में से लगभग 1 व्यक्ति को कैंसर होने का खतरा है। वहीं हर 100 में से करीब 7 लोगों की इस उम्र तक कैंसर से मौत होने का जोखिम है।
एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अगर दुनियाभर में कैंसर के मरीजों के बढ़ने का रुझान जारी रहा तो वैश्विक स्तर पर 2050 तक हर साल नए कैंसर मरीजों की संख्या बढ़कर करीब 3.5 करोड़ पहुंच सकती है। इस रिपोर्ट के अनुसार कैंसर से हर साल दुनियाभर में करीब 1 करोड़ लोगों की मौत होती है। इसे रोकने के लिए उपाय करने ज़रूरी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2022 में कैंसर के 14.1 लाख नए मामले सामने आए और 9.16 लाख लोगों की मौत हुई। 2024 में करीब 16 लाख नए कैंसर मामले और लगभग 9 लाख मौतें दर्ज होने का अनुमान लगाया गया। भारत और चीन मिलकर दुनिया के आधे से ज्यादा कैंसर मामलों का बोझ उठाते हैं।
आईएआरसी की कैंसर सर्विलांस यूनिट की उप प्रमुख डॉ. इसाबेल सोएरजोमाताराम के अनुसार भारत में फेफड़ों, मुंह, गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल), स्तन और कोलोरेक्टल कैंसर सबसे बड़ी चुनौती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्जरी, कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी आधुनिक चिकित्सा ने कई मरीजों की जिंदगी बचाई है, लेकिन रोकथाम अब भी सबसे प्रभावी और कम खर्चीला उपाय है।
आईएआरसी की रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर भी बड़ी असमानता दिखाती है। उच्च आय वाले देशों में स्तन कैंसर के 85% से ज़्यादा मरीज पांच साल बाद भी जीवित रहते हैं। जबकि कम आय वाले देशों में यह आंकड़ा 30% से भी कम है। कम और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में ज़रूरी कैंसर दवाओं की उपलब्धता सिर्फ 9% से 54% तक है, जबकि अमीर देशों में यह 68% से 94% तक पहुंचती है।
Updated on:
10 Jul 2026 05:33 am
Published on:
10 Jul 2026 05:29 am
