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सुप्रीम कोर्ट का फरमान, पॉक्सो मामलों में सूचना छिपाना भी अपराध

Supreme Court Decision: पॉक्सो मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला? आइए नज़र डालते हैं।
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भारत

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Tanay Mishra

Jul 10, 2026

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पॉक्सो मामलों (POCSO Cases) में अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को किसी नाबालिग के साथ यौन शोषण होने या होने की आशंका की जानकारी मिलती है तो उसे छिपाना नहीं चाहिए। ऐसे मामलों में उस व्यक्ति की कानूनी ज़िम्मेदारी है कि वह तत्काल इसकी सूचना पुलिस या संबंधित प्राधिकारी को दे।

पॉक्सो मामलों में सूचना छिपाना भी अपराध

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार पॉक्सो मामलों में सूचना छिपाना भी अपराध माना जाएगा। ऐसा करने वालों के खिलाफ भी कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

ज़िम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि अगर कोई बच्चा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को अपने साथ हुए यौन अपराध की जानकारी देता है तो इसे यह मानने के लिए पर्याप्त आधार माना जाएगा कि संबंधित व्यक्ति को अपराध की जानकारी थी। ऐसे में वह व्यक्ति यह कहकर ज़िम्मेदारी से नहीं बच सकता कि उसे घटना की पुष्टि नहीं थी। पॉक्सो मामलों में ऐसा करना पूरी तरह से गलत और कानून के खिलाफ माना जाएगा।

बच्चों से होनी चाहिए सीमित पूछताछ

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कई बार कम उम्र के कारण बच्चे अपने साथ हुई घटना का पूरा विवरण या उसकी प्रकृति स्पष्ट रूप से नहीं बता पाते। ऐसी स्थिति में बच्चे से सिर्फ तथ्य समझने के लिए सीमित पूछताछ की जा सकती है, लेकिन उसकी शिकायत को खारिज करने या उसे झूठा साबित करने के उद्देश्य से पूछताछ नहीं की जानी चाहिए।

शिक्षकों को राहत देने के ट्रायल कोर्ट और गुवाहाटी हाईकोर्ट का फैसला रद्द

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अरुणाचल प्रदेश के एक स्कूल से जुड़े मामले में आया, जिसमें 8 साल की बच्ची ने अपने साथ हुए यौन शोषण की जानकारी शिक्षकों, बड़ी बहन और सहपाठियों को दी थी। ट्रायल कोर्ट और गुवाहाटी हाईकोर्ट ने शिक्षकों को राहत दे दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि जिन लोगों को सीधे पीड़िता से घटना की जानकारी मिली और उन्होंने इसकी सूचना नहीं दी, उनके खिलाफ पॉक्सो कानून के तहत मुकदमा चल सकता है। हालांकि नाबालिग होने के कारण बच्ची की बहन, सहेली और हेड गर्ल और अन्य सहपाठियों पर कार्रवाई नहीं होगी।