
Masoud Pezeshkian UN: ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध अब केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भी दोनों देशों के बीच तीखी बयानबाजी सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी के अगले ही दिन ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने UN महासभा में जवाब दिया। उन्होंने साफ संकेत दिया कि तेहरान दबाव के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेगा, लेकिन युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक बातचीत की संभावना को भी बंद नहीं किया है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान ने अमेरिका के सामने अपने रुख को स्पष्ट कर दिया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि सैन्य दबाव, प्रतिबंधों और धमकियों के बावजूद उनका देश झुकने वाला नहीं है। हालांकि, उनके भाषण में एक महत्वपूर्ण संकेत यह भी रहा कि संघर्ष को समाप्त करने के लिए कूटनीति का दरवाजा खुला हुआ है।
यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के UNGA संबोधन के एक दिन बाद आया। ट्रंप ने ईरान के साथ समझौता नहीं होने की स्थिति में बेहद कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच न्यूयॉर्क में मध्यस्थों के जरिए बातचीत हुई। रॉयटर्स के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी काफी गहरे हैं, लेकिन बातचीत जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
इस पूरे संकट में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ईरान ने संकेत दिया है कि अमेरिकी सैन्य दबाव और उसके बंदरगाहों पर नाकाबंदी में ढील मिलने पर वह जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर विचार कर सकता है। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने मीडिया को बताया कि परिस्थितियां अनुकूल होने पर इसे लगभग एक सप्ताह में खोला जा सकता है।
ईरानी पक्ष की ओर से बातचीत के लिए जिन शर्तों की चर्चा हुई है, उनमें अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, जमे हुए ईरानी धन को मुक्त करना और क्षेत्र में जारी युद्ध को रोकना शामिल है।
इसी बीच यमन में हूती गतिविधियों ने संकट को और जटिल बना दिया है। क्षेत्रीय संघर्ष का असर समुद्री व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी-ईरानी कूटनीतिक संपर्क की खबरों के बीच तेल कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखा गया है।
कतर और पाकिस्तान समेत कुछ क्षेत्रीय देश तनाव कम कराने तथा हॉर्मुज में नौवहन बहाल कराने की कोशिशों में सक्रिय हैं। कतर ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संवाद का रास्ता तलाशने की कोशिशों की पुष्टि की है।