
US Marines Middle East Deployment: मध्य पूर्व में बढ़ता सैन्य तनाव अब नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिका ने ईरान के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है, वहीं रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बड़े तेल टैंकर पर हमले की घटना ने चिंता बढ़ा दी है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और संभावित टकराव को लेकर दुनिया का ध्यान फिर से खींच लिया है।
ईरान के साथ अमेरिका का टकराव एक बार फिर ऐसे मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है, जहां सैन्य तैयारियों और कूटनीतिक कोशिशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। वॉशिंगटन ने मध्य पूर्व की ओर अतिरिक्त युद्धपोत और हजारों सैनिक रवाना किए हैं। इसी बीच रणनीतिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक तेल टैंकर को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाए जाने की खबर ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। घटनाक्रम से साफ है कि आने वाले दिनों में खाड़ी क्षेत्र पर पूरी दुनिया की नजर रहने वाली है।
ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य दबाव एक नए चरण में पहुंचता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेना ने USS Theodore Roosevelt कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और USS Makin Island एम्फीबियस रेडीनेस ग्रुप को मध्य पूर्व की ओर रवाना किया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन जहाजों पर कुल करीब 9,000 नौसैनिक और मरीन सवार हैं। इनमें 2,000 से अधिक मरीन शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस तैनाती के बाद अक्टूबर के अंत तक क्षेत्र में अमेरिका के तीन एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूद हो सकते हैं। फिलहाल USS George H.W. Bush और USS George Washington पहले से ही मध्य पूर्व के आसपास तैनात हैं। इसके साथ USS Boxer एम्फीबियस रेडीनेस ग्रुप भी क्षेत्र में मौजूद है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इतनी बड़ी सैन्य मौजूदगी से वॉशिंगटन को ईरान से निपटने के लिए कई विकल्प मिलेंगे। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से जुड़ी कोशिशें किसी ठोस समझौते तक नहीं पहुंची हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के प्रस्ताव को पर्याप्त नहीं माना है और भविष्य में फिर से हमले तेज करने की संभावना से इनकार नहीं किया है।
इस बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक तेल टैंकर को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाए जाने की खबर ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया। ब्रिटेन के UK Maritime Trade Operations (UKMTO) के अनुसार, टैंकर में आग लग गई, हालांकि चालक दल के सुरक्षित होने की सूचना है। नुकसान और पर्यावरणीय प्रभाव का पूरा आकलन अभी सामने नहीं आया है। ईरान की Fars समाचार एजेंसी ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से करीब 25 लाख बैरल क्षमता वाले सुपरटैंकर के प्रभावित होने की जानकारी दी है। हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
तनाव का असर केवल समुद्र तक सीमित नहीं है। यमन में हूती लड़ाकों ने ताइज प्रांत में हमले तेज किए हैं। हाल के दिनों में लाल सागर के तटीय इलाकों में हूतियों की बढ़त के बाद सरकारी बलों ने ताइज और आसपास के मोर्चों पर अपनी स्थिति संभालने का दावा किया है। इससे लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
ब्रिटेन में भी ईरान से जुड़ी सुरक्षा जांच ने नया मोड़ लिया है। RAF Fairford से जुड़े मामले में ब्रिटिश पुलिस ने 27 वर्षीय ब्रिटिश-ईरानी दोहरी नागरिकता वाले व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। जांचकर्ताओं ने विदेशी राज्य की संभावित भूमिका समेत सभी पहलुओं की जांच जारी रखने की बात कही है।