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ईरान ने दी धमकी – अगर अमेरिका या किसी सहयोगी देश ने की कोई गलती तो किए जाएंगे घातक हमले

Iran-US Conflict: ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को घातक हमलों की धमकी दे दी है। क्या है इसकी वजह? आइए जानते हैं।
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Sep 20, 2026
Ebrahim Zolfaghari
इब्राहिम ज़ोलफाघारी (Photo - ANI)

ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच तनाव की स्थिति बरकरार है। दोनों देशों के बीच फिलहाल कोई डील नहीं हुई है जिसकी वजह से युद्ध का स्थायी अंत नहीं हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर भी दोनों देश आमने-सामने हैं। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कुछ समय पहले ही कहा है कि ईरान के खिलाफ युद्ध बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। इसी बीच ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को धमकी दे दी है।

अगर कोई गलती की तो किए जाएंगे घातक हमले

ईरान के मुख्य सैन्य कमांड खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर (Khatam al-Anbiya Central Headquarters) की तरफ से आज कड़े शब्दों में धमकी दे दी गई है। इस धमकी के अनुसार अगर अमेरिका और मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देश कोई गलती करते हैं, तो उन्हें घातक हमलों का सामना करना पड़ेगा।

क्या फिर शुरू होगी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई?

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध का अभी तक अंत नहीं हुआ है। दोनों देशों की तरफ से समय-समय पर अभी भी हमले किए जा रहे हैं। इसी बीच ईरानी मीडिया में जारी एक बयान में खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर की तरफ से कहा गया कि उन्हें खुफिया जानकारी मिली है कि अमेरिकी अधिकारियों ने यूरोप में हाल ही में हुई मीटिंग में कुछ क्षेत्रीय सहयोगी देशों के समर्थन से ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया है।

मच सकती है तबाही

ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू होगी या नहीं, इस पर अभी तक अमेरिका की तरफ से आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। लेकिन अगर ऐसा हुआ, तो दोनों देशों के बीच एक बार फिर हमलों का सिलसिला शुरू हो जाएगा और सिर्फ ईरान में ही नहीं, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव काफी ज़्यादा बढ़ जाएगा, क्योंकि अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान की तरफ से मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले किए जाएंगे। इससे फिर से तबाही मच सकती है, क्योंकि अमेरिका जहाँ ईरान में सैन्य और ठिकानों को निशाना बनाएगा, तो वहीँ ईरान भी मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों के उन सैन्य ठिकानों पर हमले करेगा जिनका इस्तेमाल अमेरिकी सेना करती है।