
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ताज़ा हमलों के बाद स्थिति गंभीर हो गई है। हाल ही में अमेरिका ने इज़रायल (Israel) के साथ मिलकर ईरान में एनर्जी साइट्स पर हमले की धमकी दी थी। अमेरिकी धमकी के बाद ईरान ने भी पलटवार किया है। ईरान के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उनके अहम एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया, तो उनकी सेना इसका बदला लेगी। ईरान की युद्धकालीन सैन्य कमान के प्रमुख मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही (Ali Abdollahi) ने कहा कि अमेरिका पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर युद्ध की आग भड़काने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
अब्दुल्लाही ने मिडिल ईस्ट में ईरान के पड़ोसी देशों से बात करते हुए कहा कि अमेरिका अपने हितों के लिए उनकी पूंजी, संसाधनों और इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल एक ढाल के तौर पर कर रहा है। अब्दुल्लाही ने यह भी कहा कि ऐसा करते हुए अमेरिका, इज़रायल की युद्ध क्षमता को भी मज़बूत कर रहा है। अब्दुल्लाही ने कहा, "साफ तौर पर कहा जा रहा है कि मुस्लिम देशों को दूरदर्शिता के साथ अमेरिका के अपराधों पर नज़र रखनी चाहिए और अमेरिका के साथ अपने सहयोग और गठबंधन पर फिर से विचार करना चाहिए। नहीं तो जो भी देश अपराधी और हमलावर अमेरिका के लिए रक्षा कवच बनेगा, वो युद्ध की आग में जल जाएगा।"
ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने फिलहाल ईरान में एनर्जी साइट्स पर हमलों के सैन्य ऑपरेशन को मंजूरी नहीं दी है। बताया जा रहा है कि अगर इस सैन्य ऑपरेशन को मंजूरी दी जाती है तो यह करीब दो हफ्ते तक चल सकता है और इसका मकसद ईरान की राजधानी तेहरान में बिजली काटी जाना और पूरे देश में अव्यवस्था फैलाना हो सकता है। कुछ दिन पहले इज़रायल के रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ ने भी कहा था कि वह ईरान की एनर्जी साइट्स पर हमला करना चाहते हैं। एक सुरक्षा सम्मेलन में उन्होंने कहा था कि अमेरिका अभी इसकी मंजूरी नहीं दे रहा है क्योंकि उसे डर है कि ईरान पड़ोसी देशों पर हमला कर सकता है और इससे दुनिया भर में तेल का संकट पैदा हो सकता है।