ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने परमाणु वार्ता पर सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिकी दबाव को खारिज कर दिया है। इजरायल में अमेरिकी युद्धपोत की तैनाती और ईरान पर नए प्रतिबंधों के बीच क्षेत्रीय सैन्य टकराव का खतरा गहराया। पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि हम न्यायसंगत और निष्पक्ष परमाणु वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन हम कोई दबाव या आदेश स्वीकार नहीं करेंगे। मिसाइल प्रोग्राम पर भी कोई बात नहीं होगी। ईरान किसी भी हाल में थोपे गए फैसलों या शर्तों को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। धमकी के माहौल में बातचीत नहीं होगी।
वहीं, ईरान की सेना का कहना है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो केवल सीमित जवाब नहीं दिया जाएगा। हम किसी भी हमले के लिए तैयार हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान को परमाणु प्रोग्राम छोड़ना पड़ेगा। इस बीच, अमेरिका का युद्धपोत इजरायल पहुंच गया है। इसे ईरान पर हमले की तैयारी माना जा रहा है।
अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी पर प्रतिबंध लगा दिए। उन पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने का आरोप लगाया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरानी कारोबारी बाबक मुर्तजा जंजानी, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड के खुफिया चीफ माजिद खादेमी पर भी प्रतिबंध लगाए हैं।
बता दें कि ईरान का यह सख्त रुख ऐसे समय सामने आया है, जब परमाणु समझौते (JCPOA) पर वार्ता वर्षों से ठप है। 2018 में अमेरिका के समझौते से बाहर निकलने के बाद ईरान पर प्रतिबंध बढ़े और तेहरान ने यूरेनियम संवर्धन तेज किया। इजरायल पहले ही साफ कर चुका है कि वह ईरान को परमाणु हथियार बनाने की इजाजत नहीं देगा और अकेली कार्रवाई का विकल्प खुला रखता है। अमेरिकी युद्धपोत का इजरायल पहुंचना इसी दबाव रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार कूटनीति विफल हुई तो क्षेत्रीय सैन्य टकराव का खतरा बढ़ सकता है।