
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच सीज़फायर खत्म होने के ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) कर चुके हैं। ट्रंप ने यह भी कहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहेगी। हालांकि एक बार फिर हमलों का सिलसिला होने से दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। इसी बीच ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) ने एक बड़ा बयान दिया है।
गालिबफ सिर्फ ईरानी संसद के स्पीकर ही नहीं, बल्कि ईरान के मुख्य वार्ताकारों में से एक भी हैं। ट्रंप की धमकियों के जवाब में गालिबफ ने साफ कर दिया है कि ईरान कभी भी सरेंडर नहीं करेगा। गालिबफ ने दो-टूक कहा, "अगर अमेरिका शांति समझौते से पीछे हटकर फिर से युद्ध चाहता है तो हमारी सेना भी तैयार है। हमारी सेना ईरान की रक्षा के लिए पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। हम पूरी तरह से रक्षा के लिए तैयार रहेंगे और अमेरिका के खिलाफ मज़बूती से खड़े होकर ईरानी लोगों के अधिकारों की रक्षा करेंगे।"
गालिबफ ने आगे कहा, "युद्ध खत्म करना दुनिया के देशों की प्राथमिकता है, लेकिन सभी को यह पता होना चाहिए कि यह टकराव कभी भी ईरान के सरेंडर से खत्म नहीं होगा। मुस्लिम देशों को अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ एकजुट होना चाहिए और आवाज़ उठानी चाहिए।"
संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में चीन (China) के डिप्टी राजदूत सुन लेई (Sun Lei) ने सुरक्षा परिषद के एक आपातकालीन सत्र में दोनों देशों से जंग रोकने की अपील की। लेई ने कहा कि शांति समझौते के तहत अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करने का वादा किया है और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। चाइनीज़ डिप्टी राजदूत ने आगे कहा, "ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए। सही और गलत की सही समझ बनाए रखना ज़रूरी है। ईरान को परमाणु हथियार न बनाने के अपने वादे का पालन करते रहना चाहिए, लेकिन ईरान को नागरिक इस्तेमाल के लिए परमाणु ऊर्जा विकसित करने का अधिकार है।"
लेई ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे विवाद के के समाधान पर चीन के निष्पक्ष और सुसंगत रुख का भी आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि चीन शांतिपूर्ण समाधान में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।