
मिडिल ईस्ट में अब इराक और ईरान के बीच ठन गई है। दोनों के बीच क्षेत्र के नक्शे और गलत बयानबाजी को लेकर विवाद बढ़ गया है। दरअसल, ईरान के कुछ दूतावासों ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर ऐसे नक्शे और टिप्पणियां पोस्ट कीं, जिन्हें इराक ने अपने हितों के खिलाफ माना। इसको लेकर इराक के विदेश मंत्रालय ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और ईरानी राजदूत को तलब कर स्पष्टीकरण मांगा।
मुख्य मुद्दा फारस की खाड़ी को लेकर था। ईरानी मिशनों ने इसे 'फारसी खाड़ी' लिखा, जबकि इराक और कई अरब देश इसे 'अरब खाड़ी' कहते हैं। इन पोस्ट्स में क्षेत्र के नक्शे भी शामिल थे, जो इराक को गलत लगे। इराक के विदेश मंत्रालय ने कहा- ईरान की ओर से ये टिप्पणियां और नक्शे दोनों देशों के अच्छे संबंधों से मेल नहीं खाते हैं।
इराक के बहुपक्षीय और कानूनी मामलों के उप मंत्री शोरश खालिद सईद ने ईरानी राजदूत मोहम्मद काजिम आले सादिक से मुलाकात की। बैठक में इराक ने इन पोस्ट्स पर सफाई मांगी।
साथ ही दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की बात भी की। इसमें आपसी दौरे बढ़ाना, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तालमेल और राजनीतिक, आर्थिक व सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपाय शामिल थे। दोनों देशों के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ने पर जोर दिया गया।
ईरान और इराक पड़ोसी हैं और कई मामलों में सहयोग करते रहे हैं। लेकिन खाड़ी के नाम और गलत नक्शे को लेकर दोनों के बीच विवाद पैदा हो गया है। इराक सरकार का कहना है कि ऐसे आधिकारिक पोस्ट्स से गलत संदेश जाता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाम का मामला दोनों के बीच विवाद का मुख्य वजह बना। फिलहाल, दोनों देश अभी एक दूसरे का सहयोग कर रहे हैं। लेकिन अगर ऐसे नक्शे या बयान दोबारा आए तो विवाद बढ़ सकता है।
इराक ने साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों पर समझौता नहीं करेगा। इस वक्त खाड़ी देशों में ईरान कई देशों से उलझ चुका है। कतर और यूएई जैसे देश ईरान को खुली धमकी दे चुके हैं।