
militia weapons surrender: इराक में सितंबर 30 की डेडलाइन तेजी से नजदीक आ रही है। नए प्रधानमंत्री अली अल-जायदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुलाई में मुलाकात के बाद वादा किया था कि ईरान समर्थित शिआ मिलिशिया ग्रुप्स अपने हथियार छोड़ देंगे। लेकिन ये वादा अब पूरा होता नहीं दिख रहा।
कई शक्तिशाली गुट साफ कह चुके हैं कि वे हथियार नहीं छोड़ेंगे। सबसे बड़ी अड़चन ये है कि ये मिलिशिया सीधे ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े हैं। वे इराक की सरकार से ज्यादा तेहरान की बात मानते हैं।
जायदी को अमेरिका का समर्थन तो मिला है, लेकिन ईरान का भी सहारा चाहिए। ऐसे में वे सख्ती नहीं दिखा पा रहे। अगस्त में प्रधानमंत्री के स्पेशल फोर्स ने हरकत अल-नुजाबा के इंटेलिजेंस चीफ को गिरफ्तार किया।
आरोप था कि उन्होंने अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन अटैक में मदद की। ग्रुप ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी। वरिष्ठ शिआ नेताओं ने बीच-बचाव कर मामले को शांत किया।
एक हफ्ते बाद चार और मिलिशिया सदस्यों को पकड़ा गया, जिनमें एक स्थानीय कमांडर भी शामिल था। फिर भी हथियार सौंपने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।
कातिब हिजबुल्लाह ने साफ कह दिया है कि सितंबर 30 तक हथियार नहीं देंगे। वे संगठन भंग करने या राज्य सुरक्षा बलों में शामिल होने को भी तैयार नहीं।
कातिब हिजबुल्लाह ने जायदी की आलोचना करते हुए शर्तें रखीं। उसने साफ कहा कि अमेरिकी सेना कभी वापस न आए और इराक के राजनीतिक-आर्थिक फैसलों पर अमेरिकी असर खत्म हो।
ये ग्रुप इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक के तहत काम करते हैं। करीब 10 गुटों में लगभग 50 हजार लड़ाकू हैं। उनके पास लंबी दूरी की मिसाइलें और एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार भी हैं।
पिछले सालों में उन्होंने इराक और सीरिया में अमेरिकी ठिकानों और इजराइल पर दर्जनों हमले किए। ड्रोन अटैक में वे और ज्यादा माहिर हो गए हैं। साथ ही निर्माण, रियल एस्टेट और करेंसी एक्सचेंज जैसे बिजनेस भी चलाते हैं।
वरिष्ठ शिआ नेता चेतावनी दे रहे हैं कि मिलिशिया पर सख्ती से देश अस्थिर हो सकता है। मिलिशिया का पुराना तर्क है कि जब तक अमेरिकी गठबंधन की सेना इराक में है, तब तक हथियार नहीं छोड़ सकते।
अब जब वे ईरान की तरफ से अमेरिका के खिलाफ लड़ाई में शामिल हैं, तो हथियार सौंपना और भी मुश्किल लग रहा है।जायदी मई में पद संभालने के बाद से इन गुटों को काबू करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन 2025 में कुछ गुटों ने हथियार छोड़ने का संकेत जरूर दिया था, वह वादा भी अधूरा रह गया।