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होर्मुज स्ट्रेट के पास आईआरजीसी ने पकड़ा अमेरिकी जासूसी ड्रोन

Iran-US Conflict: होर्मुज स्ट्रेट के पास आईआरजीसी को अमेरिका के एक जासूसी ड्रोन को पकड़ने में सफलता मिली है।
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Updated: 29 Oct 2026, 3:50 PM IST
IRGC destroys US spy drone
आईआरजीसी ने अमेरिकी जासूसी ड्रोन को किया तबाह (Photo - Video Screenshot from @IranObserver0)

ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर ईरान पर हमले शुरू करने का आदेश दे सकते हैं। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है और यह बात सिर्फ मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई हैं, लेकिन कई अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की है। इसी बीच ईरान की आईआरजीसी - इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC - Islamic Revolutionary Guard Corps) को अमेरिका के खिलाफ एक कामयाबी मिली है।

अमेरिकी जासूसी ड्रोन को पकड़ा

आईआरजीसी ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के पास एक अमेरिकी जासूसी ड्रोन को पकड़ा है। आईआरजीसी की नेवी ने एक बयान में कहा कि उसकी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट के सैनिकों ने होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में अमेरिकी सेना के एक जासूसी ड्रोन MQM-170 को सुरक्षित रूप से उतारने में सफलता हासिल की है।

क्या था अमेरिकी जासूसी ड्रोन का मिशन?

आईआरजीसी ने अपने बयान में आगे बताया कि अमेरिका के इस जासूसी ड्रोन का मिशन फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के तटीय इलाकों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम्स की पहचान करना था। आईआरजीसी नेवी के एक्सपर्ट्स ने इस जासूसी ड्रोन से मिली जानकारी के आधार पर यह पता लगाया है कि इस ड्रोन ने फारस की खाड़ी के दक्षिणी किनारे पर स्थित अमेरिका के किसी सहयोगी देश के तट से उड़ान भरी थी।

इससे पहले मार गिराया था एक अमेरिकी ड्रोन

अमेरिका के जासूसी ड्रोन जासूसी ड्रोन MQM-170 को पकड़ने से पहले आईआरजीसी को अमेरिका के एक अन्य ड्रोन को मार गिराने में भी सफलता मिली थी। आईआरजीसी ने होर्मुज स्ट्रेट के पूर्व में अपने एयरस्पेस में अमेरिका के एक MQ-1 ड्रोन को मार गिराया था। MQ-1 ड्रोन का मुख्य रूप से खुफिया, निगरानी, टोही और हल्के हमले के लिए इस्तेमाल किया जाता है और इसी वजह से ईरान में इसका अभी भी इस्तेमाल किया जा रहा है। यह एक मध्यम ऊंचाई वाला मानव रहित UAV है। अमेरिकी सेना ने 2018 में ही MQ-1 ड्रोन को सेवानिवृत्त कर दिया था। हालांकि ईरान समेत कुछ देशों में अपनी सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिका अभी भी इस ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है।