Israel-Pakistan relations: इज़राइल के राजदूत रियूवेन अज़ार को उम्मीद है कि पाकिस्तान भविष्य में इज़राइल को मान्यता देगा।
Israel-Pakistan relations: भारत में इज़राइल के राजदूत रियूवेन अज़ार (Reuven Azar) ने दिल्ली में एक सवाल के जवाब में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पाकिस्तान भविष्य में इज़राइल को मान्यता देगा। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जो कट्टरपंथ को खत्म करने की दिशा में बड़ा योगदान दे सकता है। अज़ार ने जोर देकर कहा कि अरब और मुस्लिम देशों का इस दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध होना एक सकारात्मक बदलाव है। यह बयान मध्य पूर्व में शांति प्रयासों (Middle East peace) के बीच आया है। राजदूत अज़ार ने अपने बयान में साफ किया कि इज़राइल का मानना है कि पाकिस्तान जैसे देशों का इज़राइल को मान्यता देना (Diplomatic recognition) न केवल द्विपक्षीय संबंधों (Israel-Pakistan relations) को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी फायदेमंद होगा। उन्होंने कहा कि यह कदम कट्टरपंथी ताकतों को कमजोर करने में मददगार साबित होगा। अरब देशों के हालिया कदमों का हवाला देते हुए अज़ार ने उम्मीद जताई कि मुस्लिम दुनिया भी इसी रास्ते पर चलेगी।
पाकिस्तान और इज़राइल के बीच लंबे समय से कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। 1947 में संयुक्त राष्ट्र के विभाजन योजना के खिलाफ पाकिस्तान का वोट इसका एक बड़ा कारण रहा है। हालांकि, कुछ अवसरों पर दोनों देशों के बीच गुप्त सहयोग देखा गया है, जैसे सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान। पाकिस्तान हमेशा फिलिस्तीन का समर्थन करता रहा है और कहता रहा है कि वह इज़राइल को मान्यता तभी देगा जब स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य बन जाए।
यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा संघर्ष समाप्त करने के प्रस्ताव के बाद आया है, जिसे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी समर्थन दिया है। राजदूत अज़ार ने भारत की भूमिका की सराहना की और कहा कि भारत जैसे देश आतंकवाद विरोधी दृष्टिकोण में इज़राइल के साथ खड़े हैं। कतर और मिस्र जैसे देशों की मध्यस्थता से हमास पर दबाव बनाने की उम्मीद भी जताई गई है।
भारत और इज़राइल के बीच रक्षा, नवाचार और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग बढ़ रहा है। अज़ार ने कहा कि इज़राइल अगले 10 वर्षों में 200 अरब डॉलर से अधिक के टेंडर जारी करने की योजना बना रहा है, जिसमें भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। गाजा पुनर्निर्माण में भी भारत की भागीदारी से अवसर पैदा होंगे। दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता, जैसे फिल्म सहयोग और युवा आदान-प्रदान, संबंधों को और गहरा बना रही है।
बहरहाल रियूवेन अज़ार का यह बयान पाकिस्तान को इज़राइल मान्यता देने की उम्मीद पर केंद्रित है, जो कट्टरपंथ विरोधी वैश्विक प्रयासों का हिस्सा है। अगर पाकिस्तान ऐसा करता है, तो यह मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में शांति की नई शुरुआत हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब पाकिस्तान के संभावित कदम पर टिकी हुई हैं।