False Flag: ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बहुत चौंकाने वाला दावा सामने आया है। ईरान के एक शीर्ष अधिकारी ने आरोप लगाया है कि जेफरी एपस्टीन के नेटवर्क से जुड़े लोग 9/11 जैसा बड़ा आतंकी हमला कर उसका झूठा आरोप तेहरान पर मढ़ने की फिराक में है।
Israel-Iran War: पश्चिम एशिया में इस समय हालात बहुत नाज़ुक बने हुए हैं और युद्ध का माहौल है। इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे महायुद्ध (Israel-Iran War) ने पूरी दुनिया की शांति छीन ली है और चिंता बहुत ज्यादा बढ़ा दी है। इसी बीच ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने दुनिया के सामने एक बेहद सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि अमेरिका में एक ऐसा बड़ा गुट सक्रिय है, जो कुख्यात अपराधी जेफरी एपस्टीन के नेटवर्क (Epstein Network) से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। उनका दावा है कि यह ताकतवर गुट एक भयंकर और ख़ौफ़नाक साज़िश रच रहा है। ईरान के मुताबिक, यह एक सुनियोजित झूठा हमला (False Flag Plot) हो सकता है, जिसे अंजाम देने की पूरी गुप्त तैयारी चल रही है। ईरान का यह भी मानना है कि इस गहरी साजिश के तहत अमेरिका की धरती पर साल 2001 में हुए 9/11 जैसा कोई भयानक आतंकी हमला दोबारा करवाया जा सकता है। इसके बाद, बिना किसी ठोस सुबूत के इस पूरे विनाशकारी हमले का ठीकरा जानबूझ कर ईरान के सिर फोड़ने की योजना है। इस नए और गंभीर दावे ने पहले से ही चरम पर पहुंचे मध्य पूर्व के तनाव (Middle East Tension) को और भी ज्यादा भड़का दिया है। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी (Ali Larijani) ने सोशल मीडिया पर इस खतरनाक साजिश की ओर इशारा करते हुए अमेरिका समेत पूरी दुनिया को चेतावनी दी है।
अली लारीजानी ने कहा है कि उनके पास ऐसी पुख्ता जानकारी है कि एपस्टीन से जुड़े लोग दुनिया को गुमराह करना चाहते हैं। उनका साफ कहना है कि ईरान हमेशा से आतंकवाद का पुरजोर विरोध करता आया है और उसकी आम अमेरिकी जनता से कोई भी निजी दुश्मनी नहीं है। अमेरिका और इजराइल लगातार ईरान पर आक्रामक हो रहे हैं, लेकिन ईरान संयम बरतने की कोशिश कर रहा है। लारीजानी के अनुसार, इस तरह के झूठे हमले का मुख्य मकसद केवल ईरान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम करना और अमेरिका के साथ सीधे तौर पर एक विनाशकारी युद्ध के हालात पैदा करना है। यह बयान ऐसे नाजुक समय में आया है जब इजराइल और अमेरिका लगातार ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कर रहे हैं।
मौजूदा समय में मध्य पूर्व में आग लगी हुई है। इजराइल हिजबुल्लाह और अन्य ईरानी समर्थित समूहों पर लगातार ताबड़तोड़ हमले कर रहा है। इसके जवाब में ईरान ने भी इजराइल पर कई घातक मिसाइलें दागी हैं। युद्ध के इस भीषण माहौल में अब सूचना युद्ध (Information War) भी बहुत तेज हो गया है। ईरान इस बात से डरा हुआ है कि इजराइल और उसके सहयोगी उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिल्कुल अकेला करने के लिए कोई भी बड़ी कूटनीतिक साजिश रच सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के गंभीर आरोप युद्ध के समय एक-दूसरे पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए लगाए जाते हैं। हालांकि 9/11 जैसे भयानक हमले की बात कह कर ईरान ने अमेरिकी प्रशासन को एक बहुत सीधा और कड़ा संदेश दिया है। ईरान यह साबित करना चाहता है कि पर्दे के पीछे कुछ ऐसे शक्तिशाली और अदृश्य लोग काम कर रहे हैं जो अपने निजी स्वार्थ और मुनाफे के लिए पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की भयानक आग में धकेलना चाहते हैं।
ईरान के इस बेहद गंभीर दावे पर अमेरिकी और इजराइली सरकार या सेना की तरफ से अब तक कोई भी आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। हालांकि, पश्चिमी मीडिया के कई बड़े धड़े इसे ईरान का ध्यान भटकाने वाला और सहानुभूति बटोरने वाला हथकंडा बता रहे हैं। इस सनसनीखेज बयान के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य वैश्विक सुरक्षा एजेंसियां मध्य पूर्व में हो रही हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर अब और अधिक पैनी नजर रख रही हैं। कूटनीतिक गलियारों में हलचल है कि इस मामले में आगे आने वाला कोई भी नया बयान शेयर बाजार और वैश्विक राजनीति में भारी उथल-पुथल मचा सकता है।
इस पूरे युद्ध और तनाव के बीच कुख्यात जेफरी एपस्टीन का नाम आना सबसे ज्यादा हैरान करने वाला और रहस्यमयी है। एपस्टीन के तार दुनिया के कई ताकतवर राजनेताओं, हॉलीवुड हस्तियों और अरबपतियों से जुड़े रहे हैं। ऐसे में ईरान का यह बयान एक नई और बहुत गहरी साजिश के सिद्धांत (Conspiracy Theory) को जन्म दे रहा है, जिस पर इंटरनेट पर खूब चर्चा हो रही है।