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इजरायल की राजनीति में नेतन्याहू का भविष्य: गादी आइजेनकोट से लेकर नफ्ताली बेनेट तक, कौन हैं प्रमुख चेहरे?

Benjamin Netanyahu: इजरायल की राजनीति में बेंजामिन नेतन्याहू को किन नेताओं से चुनौती मिलती है? जानिए गादी आइजेनकोट, नफ्ताली बेनेट, याइर लैपिड और अन्य प्रमुख चेहरों की भूमिका, चुनावी मुद्दे और गठबंधन से सरकार बनाने का गणित।
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Updated: 26 Oct 2026, 1:00 AM IST
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बेंजामिन नेतन्याहू(फोटो-ANI)

Israel Politics: हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले के तीन साल बाद इजरायल में मंगलवार को आम चुनाव के लिए मतदान होगा। यह चुनाव इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू के लंबे राजनीतिक वर्चस्व की परीक्षा माना जा रहा है। उनके सामने पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व में विपक्ष की मजबूत चुनौती है। चुनावी सर्वेक्षणों में आइजेनकोट की मध्यमार्गी याशार पार्टी बढ़त बनाती दिख रही है, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत किसी भी खेमे को मिलता नजर नहीं आ रहा। ऐसे में 27 अक्टूबर के बाद ईरान की बजाय इजरायल में 'रिमीज चेंज' की संभावना भी बन सकती है।

आरोपों से घिरे नेतन्याहू


नेतन्याहू को कई मोर्चों पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष उन्हें 7 अक्टूबर के हमले से पहले सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूकों के लिए जिम्मेदार ठहराता है। गाजा में युद्ध के प्रबंधन और युद्ध के बाद की स्पष्ट रणनीति नहीं होने को लेकर भी उनकी आलोचना हो रही है। इसके अलावा, उन पर धोखाधड़ी, विश्वास भंग और रिश्वत लेने के आरोपों से जुड़े मुकदमे चल रहे हैं। हालांकि अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू का समर्थन किया है।

कौन हैं प्रमुख प्रतिद्वंदी

आइजेनकोट: सेना के अनुभव के सहारे सत्ता की दावेदारी

66 वर्षीय गादी आइजेनकोट 2015 से 2019 तक इजरायली सेना के प्रमुख रहे और 2022 में राजनीति में आए। अब वे मध्यमार्गी याशार पार्टी के प्रमुख और नेतन्याहू के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी हैं। गाजा में लड़ाई के दौरान उनके बेटे और दो भतीजों की मौत ने भी उनकी राजनीतिक छवि को प्रभावित किया है। आइजेनकोट खुद को नेतन्याहू के विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं।

पूर्व पीएम नफ्ताली बेनेट: वह मध्यमार्गी नेता याइर लैपिड के साथ संयुक्त चुनावी मोर्चे 'बेयाचद' का नेतृत्व कर रहे हैं। बेनेट फलस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के विरोधी हैं ।

इतामार बेन-ग्विर: दक्षिणपंथी और कट्टर राष्ट्रवादी नेता की छवि है। इनकी 'ओत्जमा येहुदित' पार्टी नेतन्याहू के खेमे को समर्थन देती है। इसके अलावा अरब नेता मंसूर अब्बास की 'राम' पार्टी भी अहम भूमिका निभा सकती है।

सर्वे में विपक्ष आगे, लेकिन बहुमत से दूर

तीन प्रमुख इजरायली सर्वेक्षणों के अनुसार, नेतन्याहू विरोधी खेमे को 52 से 56 सीटें मिल सकती हैं, जबकि प्रधानमंत्री के सहयोगी दलों के खाते में करीब 50 सीटें जाने का अनुमान है। अरब पार्टियों को 14 से 16 सीटें मिलने का अनुमान है। 120 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2022 में लिकुड को वोट देने वालों में अब केवल 55 प्रतिशत मतदाता दोबारा उसी पार्टी को वोट देने की बात कह रहे हैं।

नतीजे से ज्यादा अहम होगा सरकार बनाने का गणित

चुनाव में आइजेनकोट की पार्टी सबसे बड़ी बनकर उभरती है, तब भी उनके लिए बहुमत जुटाना आसान नहीं होगा। नेतन्याहू के सहयोगी दल भी बहुमत से दूर दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में इजरायल की अगली सरकार के लिए बहुमत जुटाने के लिए गठबंधन का गणित भी पार्टियों को ठीक से बैठाना होगा।

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