
Israel Gaza Peace Plan: इजराइल ने गाजा में शांति प्रक्रिया को लेकर अमेरिका के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। इजराइल ने शर्त रखी है कि गाजा पट्टी से इजराइली रक्षा बलों (IDF) की किसी भी वापसी के लिए हमास का पूरी तरह और असल में हथियार छोड़ना जरूरी है। रविवार को इजराइली कैबिनेट की बैठक में, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका की मध्यस्थता वाले 15-सूत्रीय दस्तावेज को खारिज करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इजराइल अपनी सुरक्षा या अपने नागरिकों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगा।
कैबिनेट की बैठक के दौरान इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि सेना गाजा में बनी रहेगी और अपने नागरिकों के खिलाफ किसी भी खतरे को नाकाम करती रहेगी। नेतन्याहू ने साफ किया कि इजराइल 15-सूत्रीय दस्तावेज को नहीं मानता। उन्होंने कहा कि जब तक हमास सचमुच हथियार नहीं छोड़ देता, तब तक इजराइली सेना गाजा से बिल्कुल भी पीछे नहीं हटेगी। सेना हमारी फौजों और नागरिकों पर आने वाले खतरों को खत्म करना जारी रखेगी।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हमास के हथियार डालने की शर्त में भारी हथियार, हल्के हथियार और हर तरह के हथियार शामिल हैं। यह मांग असल में हथियार छोड़ने की है, न कि सिर्फ दिखावे के लिए।
बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया कि इज़राइल अपनी संप्रभुता और सुरक्षा चिंताओं को लेकर अडिग है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिकियों के साथ बातचीत चल रही है, कुछ विचार स्वीकार्य हैं, तो कुछ नहीं। उन्होंने कहा कि वे ऐसे मुद्दों पर अपनी मांगों पर मजबूती से डटे रहना जानते हैं।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' या एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र बनाने की संभावना को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, तब तक कोई फ़िलिस्तीनी राष्ट्र नहीं बनेगा, न तो गाजा में और न ही वेस्ट बैंक में।
जुलाई के आखिर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में हमास और अन्य सभी हथियारबंद समूहों के हथियार डालने को लेकर एक समझौते की घोषणा की थी। यह घोषणा अमेरिका की मध्यस्थता में महीनों तक चली बातचीत के बाद की गई, जिसके परिणामस्वरूप दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम समझौता हुआ था। इस बीच, हमास ने समझौते को आगे बढ़ाने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। जैसे कि इजराइल को गाजा पर सभी सैन्य हमले तुरंत रोकने होंगे और अक्टूबर में हुए युद्धविराम समझौते के तहत तय की गई 'येलो लाइन' तक अपनी सेना को वापस बुलाना होगा।