
Italy Iraq military mission: इराक में इटली की 12 साल लंबी सैन्य मौजूदगी मंगलवार को पूरी तरह खत्म हो गई। इटली के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि देश के आखिरी सैनिकों ने भी इराक छोड़ दिया है।
इसके साथ ही इराक में इटली की नियमित सैन्य तैनाती का एक लंबा दौर समाप्त हो गया है। हालांकि, सुरक्षा से जुड़े कुछ कामों के लिए दो इतालवी अधिकारी अभी भी देश में मौजूद रहेंगे।
इटली ने अपने ज्यादातर सैनिकों को मार्च 2026 तक इराक से वापस बुला लिया था। इसके पीछे एक अहम वजह सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता थी। मार्च में इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में स्थित एक सैन्य अड्डे को रात के समय हवाई हमले का निशाना बनाया गया था।
इस घटना के बाद इटली ने वहां तैनात अपने सैनिकों की सुरक्षा को लेकर कदम तेज कर दिए थे। अब आखिरी सैनिकों की वापसी के साथ इटली का सैन्य मिशन औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है। इटली और नाटो की सेनाओं ने स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर 30 सितंबर तक इलाके से अपनी मौजूदगी खत्म करने पर सहमति जताई थी।
इराक में इटली की सेना की मौजूदगी सिर्फ एक मिशन तक सीमित नहीं थी। इतालवी सैनिकों ने अमेरिका के नेतृत्व वाले एक ऑपरेशन में हिस्सा लिया था। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट यानी आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करना था।
इसके अलावा इटली की सेना नाटो मिशन ईराक का भी हिस्सा रही। यह मिशन सीधे युद्ध में शामिल होने के बजाय इराकी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण देने, उनकी क्षमता बढ़ाने और सलाह देने पर केंद्रित था। इस दौरान इटली ने इराक की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाई।
इस बीच, इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने सैनिकों की वापसी को इराक की सुरक्षा व्यवस्था में एक नए चरण के तौर पर बताया। उन्होंने कहा कि अब इराक अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी पहले से ज्यादा खुद संभालने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इटली की सैन्य वापसी को इसी बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है। लंबे समय तक विदेशी सैनिकों की मौजूदगी के बाद अब स्थानीय सुरक्षा बलों की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।