King Charles US Visit 2026: अमेरिका दौरे पर पहुंचे किंग चार्ल्स ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मेलानिया ट्रंप से मुलाकात की। जानिए इस मुलाकात और दौरे से जुड़ी पूरी डिटेल।
King Charles and Melania Trump White House Visit: ब्रिटेन के किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला अपने आधिकारिक दौरे पर अमेरिका पहुंच गए हैं। इस दौरे के पहले दिन वॉशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस में उनका स्वागत अमेरिकी राष्ट्रपति और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप ने किया। मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच रिश्तों, सहयोग और साझा हितों पर बातचीत हुई। यह दौरा भारत-अमेरिका की तरह ही यूके-अमेरिका के मजबूत संबंधों को रेखांकित करने वाला माना जा रहा है।
किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला के व्हाइट हाउस पहुंचने पर औपचारिक स्वागत किया गया। चारों नेताओं ने साथ में तस्वीरें खिंचवाईं और इसके बाद एक निजी चाय बैठक (टी सेशन) में हिस्सा लिया। इस दौरान हल्के माहौल में बातचीत हुई, जिसमें पारंपरिक व्यंजनों और चाय के साथ अनौपचारिक चर्चा भी शामिल रही।
मुलाकात के बाद किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला को व्हाइट हाउस के साउथ लॉन का दौरा कराया गया। राष्ट्रपति और मेलानिया ट्रंप भी उनके साथ मौजूद रहे। इसी दौरान गार्डन में बने एक खास मधुमक्खी के छत्ते (बीहाइव) को भी दिखाया गया जो व्हाइट हाउस के आकार में तैयार किया गया है। इस दौरान किंग चार्ल्स और मेलानिया ट्रंप के बीच मुस्कुराते हुए बातचीत हुई।
किंग चार्ल्स को प्रकृति और पर्यावरण के प्रति खास लगाव के लिए जाना जाता है। वे खुद भी मधुमक्खी पालन में रुचि रखते हैं और अपने शाही एस्टेट्स से ऑर्गेनिक शहद का उत्पादन करते हैं। ऐसे में व्हाइट हाउस का यह बीहाइव उनके लिए खास आकर्षण का केंद्र रहा है।
व्हाइट हाउस से निकलने के बाद किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला ने वॉशिंगटन स्थित ब्रिटिश एम्बेसी में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां और राजनैतिक चेहरे शामिल हुए। मेहमानों के लिए पारंपरिक खाने-पीने की भी व्यवस्था की गई थी।
किंग चार्ल्स का यह दौरा यूके और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक और वर्तमान संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग, संस्कृति और साझेदारी को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
अपने दौरे के अगले चरण में किंग चार्ल्स अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करने वाले हैं। यह संबोधन काफी अहम माना जा रहा है, जिसमें वे दोनों देशों के रिश्तों और वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार रख सकते हैं।