
US sanctions on Russian oil: अमेरिका की ओर से रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर नए प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद रूस ने चेतावनी दी है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका के नए प्रतिबंधों का असर यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए चल रही बातचीत पर पड़ेगा और दोनों पक्षों के बीच समझौता करना और मुश्किल हो सकता है। अमेरिका ने रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए नया विधेयक पास किया है। इसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी गई है। इससे रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी दबाव और बढ़ सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए आने वाले समय में बातचीत होने की संभावना है। उम्मीद जताई जा रही है कि अक्टूबर में कीव, वॉशिंगटन और मॉस्को के बीच नई त्रिपक्षीय बातचीत होगी। यह बैठक सितंबर में अमेरिकी राजदूत स्टीव विटकोफ और जेरेड कुशनर की कीव और मॉस्को यात्रा के बाद हो रही है, जो शांति वार्ता को फिर से शुरू करने की कोशिश का हिस्सा थी। यूक्रेन युद्ध पांचवे साल में भी जारी है।
अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने पक्ष में 262 और विरोध में 159 वोटों से लिंडसे ओ. ग्राहम प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दे दी है। इससे पहले सीनेट अगस्त में इसे पक्ष में 86 और विरोध में 11 वोट से पास कर चुकी है। अब ट्रंप के साइन करते ही यह कानून बन जाएगा। इस बिल में रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध बढ़ाने का प्रावधान है। इसके तहत रूस से ज्यादा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लग सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप के 2025 में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से अमेरिका रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ कई बार प्रतिबंध और टैरिफ लगा चुका है। यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की तेल बिक्री पर दबाव बढ़ाना अमेरिकी नीति का एक अहम हिस्सा रहा है।
अमेरिका में रूस के खिलाफ नए प्रतिबंध वाले बिल में भारत का नाम भी शामिल किए जाने के बाद विदेश मंत्रालय (MEA) ने प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए तेल खरीद का फैसला राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर किया जाता है।