
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर ने रविवार को काहिरा में हमास के आधिकारिक प्रतिनिधियों से मुलाकात की। यह मीटिंग काफी गुप्त थी। हमास के वरिष्ठ सदस्य खलील अल-हय्या भी कुछ बैठकों में मौजूद रहे।
इस मीटिंग में कुशनर के साथ ट्रंप के गाजा शांति बोर्ड के दूत निकोले म्लादेनोफ भी थे। यह कुशनर की हमास के साथ दूसरी मुलाकात थी। पहले अक्टूबर 2025 में स्टीव विटकॉफ के साथ उन्होंने ऐसी ही बैठक की थी। उसी के बाद गाजा में युद्धविराम हुआ था और 7 अक्टूबर 2023 के हमले में बंधक बनाए गए बाकी बंधकों की रिहाई भी हुई थी।
अब सोमवार को कुशनर इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मिलने वाले हैं। मकसद साफ है। ट्रंप की गाजा शांति योजना को किसी भी हाल में आगे बढ़ाना है।
ट्रंप ने जुलाई के अंत में कहा था कि हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के पूर्ण निशस्त्रीकरण पर सहमति बन गई है। योजना के मुताबिक काम चरणबद्ध तरीके से होगा। हमास हथियार छोड़ता जाएगा तो इजराइली सेना गाजा से पीछे हटेगी।
ट्रंप ने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बल और नई फिलिस्तीनी पुलिस मिलकर इलाके की सुरक्षा संभालेंगे। हालांकि, नेतन्याहू ने इस योजना को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया है।
अक्टूबर में इजराइल में चुनाव होने वाले हैं और नेतन्याहू दोबारा चुने जाने की कोशिश में हैं। ऐसे में वे ट्रंप की योजना से दूरी बनाए हुए हैं। हमास ने योजना पर सहमति जताई है, लेकिन शर्त रखी है। इजराइल पहले अपनी तरफ से वादे पूरे करे। यानी सेना वापस ले और हमले रोके। तभी हमास आगे बढ़ेगा।
अब कुशनर की यह कोशिश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका ट्रंप के नेतृत्व में गाजा में लंबे संघर्ष को खत्म करने की दिशा में दबाव बना रहा है। काहिरा की बैठक के बाद नेतन्याहू से मुलाकात से साफ है कि दोनों तरफ से बातचीत जारी रखने की कोशिश हो रही है।
हालांकि रास्ता आसान नहीं दिख रहा। एक तरफ हमास अपनी शर्तों पर अड़ा है तो दूसरी तरफ नेतन्याहू घरेलू राजनीति के दबाव में हैं। दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी साफ झलक रही है।
अब देखना यह है कि नेतन्याहू की मुलाकात से कोई नई सहमति निकलती है या नहीं। गाजा की आम जनता अभी भी युद्ध और अनिश्चितता से जूझ रही है। शांति योजना अगर आगे बढ़ती है तो वहां राहत मिल सकती है।