कैंसर के इलाज में लिविंग थैरेपी के इस्तेमाल पर चीन के वैज्ञानिकों ने बड़ा दावा किया है। क्या है यह दावा? आइए नज़र डालते हैं।
कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के सटीक उपचार को लेकर दुनियाभर में रिसर्च हो रही हैं। दुनियाभर के वैज्ञानिक इसका सटीक और आसान इलाज ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में चीन के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी सफलता मिलने का दावा किया है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने ऐसे बैक्टीरिया तैयार किए हैं, जो शरीर में जाकर खुद कैंसर के ट्यूमर को ढूंढकर उसे खत्म कर देंगे। इसे 'लिविंग थेरेपी' नाम दिया गया है। चीन के विज्ञानियों ने प्रोबायोटिक बैक्टीरिया, जो आमतौर पर शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं, उन्हें इस तरह बदला है कि वो कैंसर की कोशिकाओं को पहचान पा रहे हैं।
चीन के वैज्ञानिकों का यह परीक्षण चूहों पर सफल रहा है, जहाँ इन बैक्टीरिया ने न सिर्फ कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं व ट्यूमर को ढूंढा, बल्कि वहाँ पहुंचकर कैंसर को खत्म करने वाली दवा भी खुद ही बनाना शुरू कर दी। इससे शरीर के बाकी हिस्सों को कोई नुकसान नहीं हुआ। एक्सपर्ट्स के अनुसार यह तकनीक भविष्य में कैंसर के इलाज को बहुत आसान और सुरक्षित बना सकती है।
शेडोंग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ई-कोलाई बैक्टीरिया में बदलाव किए। ये बैक्टीरिया शरीर के अंदर जाकर एक छोटी फैक्ट्री की तरह काम करते हैं। ये सीधे ट्यूमर के पास जमा हो जाते हैं और वहाँ रोमिडेप्सिन नाम की दवा बनाने लगते हैं, जो कैंसर को खत्म करती है।
अक्सर कैंसर के इलाज में दी जाने वाली कीमोथेरेपी से शरीर पर बुरा असर पड़ता है और बाल झडऩे जैसी समस्याएं होती हैं, लेकिन नई तकनीक में बैक्टीरिया केवल खराब कोशिकाओं पर हमला करते हैं। इससे साइड इफेक्ट्स नहीं होंगे और मरीज जल्दी ठीक हो सकेगा।
चूहों पर परीक्षण सफल होने के बाद अब वैज्ञानिक इंसानों पर परीक्षण की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि उनका मानना है कि इंसानों पर इसका इस्तेमाल करने से पहले अभी और रिसर्च की ज़रूरत है। भविष्य में यह पक्का किया जाएगा कि इलाज के बाद इन बैक्टीरिया को शरीर से सुरक्षित तरीके से कैसे बाहर निकाला जाए।