
यूनाइटेड नेशन्स जनरल असेंबली - यूएनजीए (United Nations General Assembly - UNGA) के 81वें सत्र में आज ईरान (Iran) के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान (Masoud Pezeshkian) ने संबोधन दिया। अपने संबोधन में उन्होंने अमेरिका के खिलाफ चल रहे युद्ध में ईरान का पक्ष साफ़ तौर पर रखा और दो-टूक सुना दी कि उनका देश कभी सरेंडर नहीं करेगा।
पेज़ेशकियान ने अपने संबोधन में कहा, "ईरान ने पिछले 200 सालों में किसी पर हमला नहीं किया है, लेकिन अब हम पर मिडिल ईस्ट में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया जा रहा है और हमें आतंकी कहा जा रहा है। हम हमला करने या आक्रामकता दिखाने के लिए ताकत नहीं चाहते। हम तरक्की के लिए परमाणु ऊर्जा चाहते हैं न कि हथियारों से समाजों को डराने-धमकाने के लिए। ईरान के रक्षा सिस्टम इस तरह बनाए गए हैं कि कोई यह न सोच सके कि ईरानी शहरों पर बमबारी का कोई जवाब नहीं दिया जाएगा। हम साफ़ तौर पर कहते हैं - अपने देश की रक्षा के लिए हमें किसी की इजाज़त या मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं है।"
"ईरान अपनी ताकत का इस्तेमाल दबदबा बनाने के लिए नहीं करना चाहता। ईरान दूसरों की असुरक्षा में अपनी सुरक्षा नहीं ढूंढता। ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा है। हालांकि हमारे देश को शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक का जन्मसिद्ध अधिकार है। हम अपना सिर नहीं झुकाएंगे और उस अधिकार को नहीं छोड़ेंगे जो स्वाभाविक रूप से हमारा है। हम साफ तौर पर कहते हैं - हम कोई परमाणु हथियार नहीं बना रहे और हमारी शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक पर कोई पाबंदी नहीं होगी।"
“जो लोग बीमार हैं, मासूम लोग हैं, गरीब हैं, हमारे समाज में सबसे कम सुविधा वाले लोग अमेरिकी प्रतिबंधों के निशाने पर हैं। अमेरिका अपने नाजायज़ मकसद को पूरा करने के लिए किसी देश की आबादी की बलि देना चाहता है।"
पेज़ेशकियान ने अपने संबोधन के अंत में कहा, "डोनाल्ड ट्रंप को यह पता होना चाहिए कि प्रतिबंधों, बढ़ते दबाव और धौंस-धमकी के बावजूद ईरानी लोगों का प्रतिरोध और बढ़ेगा। हम कभी भी अपना सिर नहीं झुकाएंगे और न ही घुटने टेकेंगे। ईरान बातचीत और समझौते के लिए तैयार है, लेकिन हम कभी भी ताकत की भाषा को स्वीकार नहीं करेंगे।"