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Mecca Defence Pact: अगले हफ्ते होगी पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की की इमरजेंसी मीटिंग

Emergency Meeting: मक्का रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की अगले हफ्ते एक इमरजेंसी मीटिंग करने वाले हैं।
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Oct 02, 2026
Mecca Defence Pact
मक्का रक्षा समझौता (Photo - @TheTimesOfIsrael on social media)

पाकिस्तान (Pakistan), सऊदी अरब (Saudi Arab) और तुर्की (Turkey) मक्का रक्षा समझौते (Mecca Defense Pact) के तीन सदस्य हैं। तीनों देशों ने इस रक्षा समझौते के तहत ज़रूरत के समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहने पर सहमति जताई है। इस समझौते के तहत तीनों देशों की एक इमरजेंसी मीटिंग होने वाली है, जिसकी जानकारी पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार (Ishaq Dar) ने दी। यह इमरजेंसी मीटिंग अगले हफ्ते सऊदी अरब में होगी।

हूतियों के हमलों पर होगी चर्चा

इस्लामाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए डार ने अगले हफ्ते मक्का रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच होने वाली इमरजेंसी मीटिंग के बारे में बताया। इस मीटिंग में यमन (Yemen) के हूती विद्रोहियों (Houthis) द्वारा सऊदी अरब पर किए जा रहे हमलों पर मुख्य रूप से चर्चा होगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच पिछले कुछ समय में तनाव काफी बढ़ गया है। दोनों पक्षों की तरफ से एक-दूसरे पर हमले किए जा रहे हैं। सऊदी अरब समर्थित यमन की सरकारी सेना भी हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, जिससे दोनों पक्षों के बीच भी आए दिन ही मुठभेड़ होती रहती है।

क्या है मक्का रक्षा समझौता?

मक्का रक्षा समझौता पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच 7 अगस्त 2026 को मक्का में हस्ताक्षरित एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौता है। इसे सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद (Mohammed bin Salman Al Saud), तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdoğan) और पाकिस्तानी पीएम शहबाज़ शरीफ (Shehbaz Sharif) ने साइन किया था। यह नाटो (NATO) के आर्टिकल-5 की तरह सामूहिक सुरक्षा का सिद्धांत अपनाता है, जिसमें एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। इस रक्षा समझौते में सैन्य उत्पादन, संयुक्त अभ्यास और खुफिया साझाकरण का प्रावधान है। इसका सचिवालय सऊदी अरब में स्थापित किया गया है।

6 से ज़्यादा देश होना चाहते हैं शामिल

पाकिस्तानी विदेश मंत्री डार ने बताया कि 6 से ज़्यादा देश मक्का रक्षा समझौते में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन जब तक यह समझौता पूरी तरह से लागू नहीं हो जाता, तब तक इसमें शामिल होने के नए अनुरोधों पर विचार करना संभव नहीं होगा। डार का कहना है कि इसमें एक साल तक का समय लग सकता है।