अगर आपको बताया जाए कि एक ऐसा कंप्यूटर है जो बिना बिजली के काम करता है, तो आपको यह मज़ाक लगेगा। लेकिन यह सच है। आइए इसके बारे में जानते हैं।
क्या कोई मशीन बिना बिजली के काम कर सकती है? क्या कोई कंप्यूटर बिना बिजली के चल सकता है? इन सवालों का सामान्य तौर पर जवाब नहीं है, लेकिन अगर आपको बताया जाए कि अब एक ऐसा कंप्यूटर बन गया है, जो बिना बिजली के काम कर सकता है, तो आपको जानकार हैरानी होगी। सुनने में यह भले ही कल्पना लगे, लेकिन यह सच है। अमेरिकी भौतिक वैज्ञानिक जोसेफ डी. पॉल्सन ने इसे हकीकत में बदल दिया है। जोसेफ ने साधारण लोहे की छड़ों, स्प्रिंग्स और बोल्ट्स से एक ऐसा 'मैकेनिकल कंप्यूटर' तैयार किया है जो बिना बिजली के काम करता है।
इस कंप्यूटर का मुख्य पार्ट एक छोटी घूमने वाली छड़ ‘हिस्टेरोन’ है, जो अपनी पिछली स्थिति को याद रखती है। पहले कितना बल लगा, वही अगली स्थिति तय करता है। स्प्रिंग्स की दिशा बदलकर ‘कोडिंग’ की जाती है। समानांतर स्प्रिंग्स तालमेल बनाते हैं, जबकि क्रॉस स्प्रिंग्स विरोध पैदा करते हैं। इसी खींचतान में कंप्यूटर अपना 'काम' करता है, जो एक कमाल का कॉन्सेप्ट है।
जोसेफ की टीम ने इस कंप्यूटर से तीन अहम काम करके दिखाए। पहला, यह अपनी स्थिति को लॉक कर सकता है, जिसे बदलने के लिए ज़्यादा बल चाहिए। दूसरा, छड़ों की शृंखला के ज़रिए यह डोमिनोज़ की तरह गिनती कर सकता है। तीसरा, यह पहचान सकता है कि उसे सम बार धक्का दिया गया या विषम।
भविष्य के लिए यह तकनीक बेहद उपयोगी हो सकती है। सिराक्यूज़ यूनिवर्सिटी में विकसित यह तकनीक भविष्य में ऐसे कंप्यूटर, रोबोट और सेंसर बना सकती है, जो समुद्र की गहराई या अंतरिक्ष में बिना बिजली के भी काम करते रहें। बिना बिजली समुद्र की गहराई या अंतरिक्ष में काम करने वाले कंप्यूटर, रोबोट और सेंसर से वैज्ञानिकों को काफी मदद मिल सकती है।