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Saudi UAE Rift: यमन में सऊदी हमला, यूएई सेनाएं वापस, 24 घंटे के अल्टीमेटम से तनाव बढ़ा

Saudi UAE Rift: यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर सऊदी हवाई हमले के बाद यूएई ने सेनाएं वापस बुलाने का ऐलान किया। दोनों मुस्लिम देशों के बीच अलगाववादियों को लेकर गहरा विवाद हो गया है, क्षेत्रीय शांति खतरे में है।

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Dec 31, 2025
सऊदी अरब ने यमन में हमला कर दिया। ( फोटो: X / Madhurendra) kumar

Saudi UAE Rift: यमन में चल रहे पुराने हिंसक संघर्ष (Saudi UAE Rift) ने नया मोड़ ले लिया है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच गहरी दरार सामने आ गई है। दरअसल दोनों मुस्लिम देश यमन के अलग-अलग गुटों का समर्थन करते हैं, जिससे स्थिति बहुत तनावपूर्ण हो गई है। हाल ही में सऊदी गठबंधन ने यमन के एक बंदरगाह पर हवाई हमले(Yemen Airstrikes) किए, जिसके बाद 24 घंटे में यूएई बलों को देश छोड़ने का आदेश (24 Hours Ultimatum) दिया। यह विवाद मुकल्ला बंदरगाह (Mukalla Port Attack) से शुरू हुआ। सऊदी अरब का आरोप है कि यूएई ने दो जहाजों से हथियार और बख्तरबंद वाहन भेजे थे, जो दक्षिणी अलगाववादी गुट साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के लिए थे। इन जहाजों ने ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर रखा था। सऊदी अरब ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताया और हमले से पहले नागरिकों को चेतावनी दी। हमलों में हथियारों की खेप नष्ट हो गई।

यूएई के साथ सुरक्षा समझौता रद्द कर दिया

सऊदी अरब समर्थित यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) ने यूएई के साथ सुरक्षा समझौता रद्द कर दिया। उन्होंने यूएई बलों को 24 घंटे में यमन खाली करने का अल्टीमेटम दिया। पीएलसी का कहना है कि यूएई अलगाववादियों को समर्थन देकर देश की एकता को नुकसान पहुंचा रहा है। एसटीसी ने हाल ही में तेल समृद्ध प्रांत हदरमाउत और महरा पर कब्जा किया, जो सऊदी अरब की सीमा से लगते हैं।

तनाव कम करने की कोशिश की

यूएई ने इन आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि जहाजों में सिर्फ उनके आतंकवाद विरोधी बलों के लिए वाहन थे। यूएई ने क्षेत्रीय स्थिरता की बात करते हुए तनाव कम करने की कोशिश की। बाद में यूएई ने घोषणा की कि वह यमन से अपनी बाकी सेनाएं वापस बुला लेगा। दोनों देशों के बीच यह सार्वजनिक झगड़ा दुर्लभ है, क्योंकि वे गल्फ सहयोग परिषद के सहयोगी हैं।

यूएई दक्षिणी अलगाववादियों का समर्थन करता रहा

इस तनाव की जड़ यमन के गृहयुद्ध में है। सऊदी अरब एकजुट यमन चाहता है और हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई में पीएलसी का साथ देता है। वहीं यूएई दक्षिणी अलगाववादियों का समर्थन करता रहा है, जो दक्षिण यमन को अलग देश बनाना चाहते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में इजरायल की भूमिका का भी जिक्र है, क्योंकि दक्षिण यमन की स्वतंत्रता से लाल सागर पर नियंत्रण मजबूत हो सकता है।

निवेशक तेल आपूर्ति और नए युद्ध की चिंता कर रहे

इस घटना से क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ा है। गल्फ देशों के शेयर बाजार गिर गए, क्योंकि निवेशक तेल आपूर्ति और नए युद्ध की चिंता कर रहे हैं। ओमान जैसे पड़ोसी देशों ने शांतिपूर्ण बातचीत की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह झगड़ा यमन की शांति प्रक्रिया को और पीछे धकेल सकता है।

जनता पहले से ही युद्ध, गरीबी और मानवीय संकट से जूझ रही

दोनों देशों के नेता अब तक चुप हैं, लेकिन पीछे से बातचीत चल रही होगी। यमन की जनता पहले से ही युद्ध, गरीबी और मानवीय संकट से जूझ रही है। यह नया विवाद स्थिति को और जटिल बना रहा है। क्या सऊदी और यूएई अपने मतभेद सुलझा पाएंगे, या यमन में नया संघर्ष शुरू होगा? आने वाले दिन बताएंगे।

दोनों देशों में बातचीत से तनाव कम हो सकता है

सऊदी अरब ने यूएई की कार्रवाई को रेड लाइन बताया और कड़ी कार्रवाई की। यूएई ने आरोपों का खंडन कर दिया और सेनाएं वापस बुलाने का ऐलान किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई गई, गल्फ बाजार प्रभावित हुए। यूएई की सेनाएं वापस लौट रही हैं या नहीं, इस पर नजर रहेगी। दोनों देशों के बीच बातचीत से तनाव कम हो सकता है। यमन में एसटीसी की गतिविधियां और सऊदी की प्रतिक्रिया आगे की स्थिति तय करेंगी।

इजरायल और लाल सागर की रणनीति भी पीछे से भूमिका निभा रही है

बहरहाल, यह सिर्फ यमन का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन का है। सऊदी एकता चाहता है, यूएई अलगाववाद का समर्थन। इजरायल और लाल सागर की रणनीति भी पीछे से भूमिका निभा रही है।

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