
ईरान (Iran) और अमेरिका (United States of America) के बीच तनाव अभी भी खत्म नहीं हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के आदेश पर अमेरिकी सेना ने देश में मिडटर्म चुनाव से कुछ घंटे पहले ही ईरान पर हमले कर दिए। अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के पास स्थित केशम आइलैंड (Qeshm Island) पर हमले किए। ये हमले सीमित लेवल पर किए गए थे। हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि ट्रंप फिर से ईरान पर हमले का आदेश नहीं देंगे। ट्रंप चाहते हैं कि ईरान उनकी सभी शर्तें मानते हुए अमेरिका के सामने सरेंडर कर दे। इस मामले पर अब ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ने दो-टूक सुना दी है।
मोजतबा ने इस मामले पर कहा, "अमेरिका, ईरान से बिना शर्त सरेंडर कराने की कोशिश कर रहा है। इससे सिर्फ आक्रामकता और बढ़ेगी। अगर वर्चस्ववादी दुश्मन के सामने ईरान ने सरेंडर करने का सोचा भी या इस दिशा में थोड़ा सा भी झुकाव दिखाया गया, तो अब तक हासिल की गई बड़ी उपलब्धियाँ बर्बाद हो जाएंगी। शहीदों के खून और पूरे देश का बलिदान व्यर्थ हो जाएगा। साथ ही इससे अहंकारी दुश्मन का हौसला बढ़ेगा, जिससे वो आगे जाकर और बड़ी मांगें रखेगा और और ज़्यादा युद्ध तथा आक्रामक कार्रवाइयाँ करेगा। ऐसे में ईरान कभी सरेंडर नहीं करेगा।"
इस मामले पर ईरान का रुख हमेशा से साफ रहा है। ईरान के सभी नेताओं और अधिकारियों ने कई मौकों पर कहा है कि ईरान कभी भी अमेरिका के सामने सरेंडर नहीं करेगा और अपने देश की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईरान पहले भी अमेरिका के हमलों के आगे झुका नहीं है और जवाबी कार्रवाई भी की है।
युद्ध की वजह से ईरान को काफी नुकसान भी झेलना पड़ा है, लेकिन अमेरिका को भी कम नुकसान नहीं हुआ है। युद्ध की वजह से अमेरिका की अर्थव्यवस्था को भी चोट पहुंची है और देश में महंगाई भी बढ़ी है। इतना ही नहीं, इस युद्ध की वजह से बड़ी तादाद में अमेरिकी जनता ट्रंप से नाराज़ हो गई है जिसका परिणाम अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में देखने को मिला, जिसमें ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को डेमोक्रेटिक पार्टी के खिलाफ करारी हार का सामना करना पड़ा। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेज़ेन्टेटिव और सीनेट दोनों में ही डेमोक्रेटिक पार्टी को बहुमत हासिल हो गया है, जो ट्रंप की एक बड़ी हार है।