विदेश

Nepal Flood 2026: अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हो चुकी थीं, तभी मलबे से निकली जिंदगी! 11 दिन बाद जिंदा मिली 64 साल की महिला

Nepal Flash Flood 2026: 11वें दिन मलबे के बीच से आई कमजोर आवाज ने बचाव दल को रोक दिया। खिड़की तोड़कर अंदर पहुंचे जवानों को जो मिला, उसने पूरे इलाके को हैरान कर दिया।
2 min read
• •
Updated: 6 Sep 2026, 8:43 AM IST
Nepal Flood 2026
Nepal Flood 2026: नेपाल बाढ़ में 11 दिन बाद 64 वर्षीय महिला जिंदा मिली (फोटो सोर्स:@Nepal Police)

Woman Rescued After 11 Days: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के 11 दिन बाद एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने राहत और बचाव अभियान से जुड़ी उम्मीदों को फिर जगा दिया। जिस 64 वर्षीय महिला को परिजन मृत मानकर अंतिम संस्कार की रस्में शुरू कर चुके थे, वह उसी घर के मलबे के नीचे से जिंदा मिली। उधर, रासुवा के जलविद्युत सुरंगों में फंसे दो नेपाली श्रमिकों के बाद एक चीनी नागरिक को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। लगातार मिल रही इन जिंदगियों ने बचाव दलों को तलाश जारी रखने का नया हौसला दिया है।

रासुवा की सुरंग में 225 मीटर भीतर फंसे चीनी नागरिक को भी जिंदगी की नई राह मिली। लेकिन हजारों लोगों की तलाश अभी बाकी है।

Nepal Flood 2026: मलबे में 11 दिन तक जिंदगी से जूझती रही महिला

नुवाकोट के बिदुर नगरपालिका-10 स्थित बेत्रावती में चंडिका श्रेष्ठ के परिवार ने शायद उनके लौटने की उम्मीद छोड़ दी थी। 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी बेसिन में अचानक आई बाढ़ और मलबे ने इलाके में भारी तबाही मचाई थी। चंडिका अपने परिवार के चार अन्य सदस्यों के साथ लापता हो गई थीं।

आठवें दिन परिवार ने कुश घास से उनका प्रतीकात्मक पुतला बनाकर मृत्यु संस्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी। मगर 11वें दिन कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।

शनिवार सुबह सड़क निर्माण में जुटी सशस्त्र पुलिस बल की टीम को मलबे के पास से बेहद धीमी आवाज सुनाई दी। जवानों ने तुरंत खुदाई शुरू की। खिड़की तोड़कर भीतर घुसे बचावकर्मियों को चंडिका जीवित मिलीं। बाढ़ की ताकत इतनी जबरदस्त थी कि पूरा मकान करीब 100 मीटर ऊपर की ओर खिसक गया था और कई मंजिलें कीचड़ में दब गई थीं। चंडिका को नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर से काठमांडू ले जाकर बीरेंद्र अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सुरंगों में भी मिली जिंदगी की सांस

इससे पहले अपर त्रिशूली-3ए परियोजना की सुरंग में करीब 170 मीटर अंदर फंसे संजय शाह और कबीर महर्जन को बचाया गया था। प्रसिद्ध सुरंग विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स ने भी कहा है कि भूमिगत स्थानों में लोग अनुमान से कहीं अधिक समय तक जीवित रह सकते हैं।

शनिवार को अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञों के सहयोग से नेपाली सेना ने 225 मीटर भीतर फंसे चीनी नागरिक लू हैताओ को बाहर निकाला। कमजोर हालत में मिले लू को पानी दिया गया और बाद में हेलीकॉप्टर से काठमांडू पहुंचाया गया। मोबाइल की बैटरी खत्म हो चुकी थी, इसलिए उन्होंने अनुवाद सॉफ्टवेयर की मदद से अधिकारियों से संवाद किया।

हजारों की तलाश अब भी जारी

नेपाल में यह आपदा एक दशक की सबसे भयावह त्रासदियों में गिनी जा रही है। अब तक 1,338 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 5,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। अकेले रासुवा की विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं में लगभग 1,000 लोगों के लापता होने की जानकारी है।

बचाव अभियान में सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 21,465 जवान तैनात हैं। ड्रोन की मदद से कीचड़ और मलबे वाले इलाकों की निगरानी की जा रही है। अब तक आसपास से 24 शव भी बरामद किए जा चुके हैं।

चंडिका श्रेष्ठ की जिंदगी ने एक बेहद अहम संदेश दिया है मलबे के बीच खामोशी हमेशा मौत का संकेत नहीं होती। यही वजह है कि बचाव दल अब सुरंगों, दबे मकानों और मलबे के हर संभावित हिस्से को फिर से खंगाल रहे हैं।

Updated on:
6 Sep 2026, 8:43 AM IST
Published on: