
US-Iran War: अमेरिका ने ईरान पर किए हवाई हमले, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तेल टैंकरों पर IRGC का हमला (फोटो सोर्स:@MuzamilK9865)
Iran Attack on US Warships: खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब समुद्र में सीधी सैन्य टक्कर की ओर बढ़ता दिख रहा है। अलजजीरा X के ताजा अपडेट के अनुसार ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी नौसेना के एक एयरक्राफ्ट कैरियर और एक गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिका ने कहा कि उसके दोनों युद्धपोत हमलों से बच निकले और किसी अमेरिकी सैनिक के घायल होने की खबर नहीं है।
घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ा। IRGC ने अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल हमले का दावा करते हुए आरोप लगाया कि ये जहाज ईरानी शिपिंग को परेशान कर रहे थे और समुद्री नाकेबंदी लागू करने की कोशिश कर रहे थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, उसके एयरक्राफ्ट कैरियर और विध्वंसक ने कई मिसाइलों से बचाव किया। अमेरिकी पक्ष ने किसी सैन्यकर्मी के हताहत होने की जानकारी नहीं दी।
इसके बाद अमेरिका ने ईरान के तीन तेल टैंकरों पर कार्रवाई की। सेंट्रल कमांड के अनुसार, M/T Downy को खार्ग द्वीप के पास और M/T Stark 1 को जास्क के नजदीक इस तरह क्षतिग्रस्त किया गया कि वे काम करने की स्थिति में नहीं रहे। तीसरे टैंकर M/T Kylo, जिसे Noxen के नाम से भी जाना जाता है, को ओमान की खाड़ी में पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन जहाजों का संबंध ईरान की उस ‘शैडो फ्लीट’ से था, जिसके जरिए प्रतिबंधों के बावजूद तेल कारोबार चलता है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने तेहरान को बेहद सख्त चेतावनी दी है। उनका संदेश साफ था अगर ईरान अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर हमला जारी रखता है तो अमेरिका उसके तेल टैंकरों को नष्ट और डुबो सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी विमान, जहाज और पनडुब्बियां ईरानी टैंकरों को मध्य पूर्व के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी निशाना बनाने में सक्षम हैं।
वहीं, ईरानी सैन्य नेतृत्व ने संकेत दिया है कि अमेरिकी जहाजों पर कार्रवाई और तेज हो सकती है। IRGC ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कुछ टैंकरों को अनधिकृत मार्ग से गुजरने का आरोप लगाते हुए उन्हें भी निशाना बनाने की बात कही है।
इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा दबाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां किसी भी लंबे सैन्य गतिरोध से तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर सीधा असर पड़ सकता है। हालिया घटनाक्रम के बीच ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
यानी अमेरिका और ईरान के बीच यह लड़ाई अब केवल युद्धपोतों और मिसाइलों तक सीमित नहीं रह गई है। एक तरफ समुद्री नाकेबंदी और दूसरी तरफ तेल टैंकरों पर हमले अगर टकराव और बढ़ा, तो इसका असर पूरे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे सकता है।
Updated on:
6 Sep 2026, 6:55 AM IST
Published on:
6 Sep 2026, 6:22 AM IST
बड़ी खबरें
View Allविदेश
ट्रेंडिंग
US Israel Iran War
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.