
यूक्रेन के तीसरे सबसे बड़े शहर ओडेसा में रूसी भाषा को लेकर बहस तेज। (FILE Photo -ANI)
Odesa considers Russian language ban: यूक्रेन के तीसरे सबसे बड़े शहर ओडेसा में रूसी भाषा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शहर की परिषद इस हफ्ते एक प्रस्ताव पर फैसला कर सकती है। इसमें सार्वजनिक जगहों पर रूसी भाषा के संगीत और साहित्य के इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही गई है। ओडेसा में बड़ी संख्या में लोग रूसी बोलते हैं। इसलिए प्रस्ताव को लेकर बहस तेज हो गई है।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव के तहत सड़कों, पार्कों, सरकारी संस्थानों, सरकारी कला और मनोरंजन स्थलों पर रूसी भाषा के कंटेंट पर रोक लगाने की बात है। सार्वजनिक पुस्तकालयों में रूसी भाषा की किताबें प्रदर्शित नहीं की जा सकेंगी। ओडेसा के पुराने लोकप्रिय रूसी गीतों को सार्वजनिक जगहों पर बजाने पर भी रोक लग सकती है। निजी दुकानों और कैफे पर यह प्रतिबंध सीधे तौर पर अनिवार्य नहीं होगा। हालांकि उन्हें भी रूसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि रूस भाषा और संस्कृति के जरिए यूक्रेन में अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करता है। ओडेसा के वकील आर्टेम कार्ताशोव ने रूसी भाषा को रूस का हथियार बताया। उनके मुताबिक रूसी भाषा और संगीत का असर खासकर युवाओं पर पड़ सकता है। ओडेसा की भाषा अधिकारी अन्ना नेरुश का कहना है कि सड़कों पर रूसी भाषा सुनना युद्ध से प्रभावित लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
ओडेसा के मशहूर हास्य कलाकार बोरिस बार्स्की इस प्रस्ताव का विरोध करते हैं। उनका कहना है कि रूसी सिर्फ राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भाषा नहीं है। यह दोस्तोयेव्स्की और बुल्गाकोव जैसे बड़े लेखकों की भी भाषा है। मानवविज्ञानी अनास्तासिया पिलियाव्स्की का भी मानना है कि असली सवाल भाषा का नहीं, बल्कि स्वतंत्रता का है। उनके मुताबिक रूसी बोलने वाले लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से दूर किया जा रहा है।
2022 में रूस के पूर्ण हमले के बाद कई रूसी भाषी यूक्रेनियों ने यूक्रेनी भाषा अपनाई है। यूक्रेन में 2019 से कई सार्वजनिक और पेशेवर क्षेत्रों में यूक्रेनी भाषा का इस्तेमाल अनिवार्य है। ओडेसा के शिक्षक पावलो विक्टर का कहना है कि यूक्रेनीकरण जबरदस्ती नहीं होना चाहिए। लोगों के लिए ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए कि वे खुद यूक्रेनी भाषा अपनाना चाहें। फिलहाल परिषद में प्रस्ताव के समर्थन को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। लेकिन इसने ओडेसा में भाषा, संस्कृति, राष्ट्रीय पहचान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नई बहस जरूर छेड़ दी है।
Updated on:
06 Sept 2026 07:14 am
Published on:
06 Sept 2026 07:14 am
