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Nepal Flood: ‘न इंसान बचे, न बस्तियां,’ नेपाल में बाढ़ से तबाही के बाद स्थानीय लोगों ने और क्या बताया

Nepal Flood Devastation: नेपाल में बाढ़ के बाद देविघाट समेत कई इलाकों में तबाही का मंजर बरकरार है। स्वयंसेवक और सुरक्षाकर्मी मलबा हटाने, शवों की तलाश और सड़क संपर्क बहाल करने में जुटे हैं। करीब 20 हजार सुरक्षाकर्मी राहत अभियान में तैनात हैं। हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि कई अब भी लापता हैं।
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Aug 31, 2026
Devighat flood rescue
नेपाल में बाढ़ ने तबाही मचाई (Photo-IANS)

Nepal Flood: नेपाल में बाढ़ के बाद तबाही का मंजर बरकरार है। बाढ़ प्रभावित देविघाट समेत आसपास के इलाकों में राहत, बचाव और सफाई अभियान तेज कर दिया गया है। स्वयंसेवक मलबा हटाने, रास्ते खोलने और मलबे में दबे लोगों के शवों की तलाश में प्रशासन की मदद कर रहे हैं।

लिक्खु ग्रामीण नगरपालिका के निवासी सीताराम पुलाइमर ने कहा कि नगरपालिका के वार्ड 1 से 6 तक के लोग देविघाट में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए जा रह हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी देविघाट जा रहे हैं। हमारा उद्देश्य बाढ़ पीड़ितों के बचाव और सफाई अभियान में मदद करना है। 

उन्होंने बताया कि प्रभावित इलाके में भारी तबाही हुई है और कई जगह केवल मलबा ही बचा है। स्वयंसेवक अपने स्तर पर करीब 100 से 200 लोगों, दो भारी मशीनों और 10 टिपर ट्रकों के साथ मलबा हटाने में जुटे हैं। 

‘ऐसी बाढ़ जिंदगी में पहली बार देखी’

लिक्खु वार्ड-6 के नवराज थापा ने बाढ़ की भयावहता को बताया। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में इससे पहले इतनी बड़ी आपदा नहीं देखी। उन्होंने कहा कि बाढ़ बहुत भीषण थी। जिंदगी में पहली बार ऐसा कुछ देखा है। यह बेहद दर्दनाक है। मैं 50 साल का हूं, लेकिन कभी नहीं सोचा था कि ऐसा मंजर भी देखना पड़ेगा।

थापा ने बताया कि देविघाट, त्रिशूली, बेत्रावती, झोले और तिमुरे समेत कई इलाकों में भारी तबाही हुई है। उन्होंने कहा कि कई लोग अब भी लापता हैं और वास्तविक मृतकों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है।

उन्होंने कहा कि आज अगर आप वहां जाकर देखें तो सिर्फ तबाही और उजाड़ नजर आता है। न लोग बचे हैं, न बस्तियां, न खाने का इंतजाम और न ही रहने की जगह। हालात बेहद खराब हैं।

शवों की तलाश के लिए मलबा हटाने का अभियान

लिक्खु वार्ड-6 के महेश कुमार डंगोल ने बताया कि 10 से 12 टिपर ट्रकों और दो JCB मशीनों के साथ डुंगे से बेत्रावती तक सड़क साफ करने का काम शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य सड़क संपर्क बहाल करने के साथ-साथ मलबे में दबे शवों की तलाश में मदद करना भी है।

डंगोल ने कहा कि त्रिशूली बाजार, डुंगे बाजार, बेत्रावती, तिमुरे और देविघाट में कई मकान बाढ़ के पानी में बह गए हैं। नदी किनारे बनी कई बस्तियां पूरी तरह तबाह हो गई हैं।

उन्होंने बताया कि वह बाढ़ आने के बाद 26 तारीख से लगातार राहत अभियान में जुटे हैं। उनके मुताबिक, वह रात में कुछ समय आराम करने के बाद फिर प्रभावित क्षेत्र में लौट जाते हैं।

21 अस्पतालों में रखे गए अज्ञात शव

अधिकारियों के अनुसार, देशभर के 21 अस्पतालों में अज्ञात शव रखे गए हैं। इन शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

लापता लोगों में 933 क्षेत्रीय जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी, 592 विदेशी नागरिक और 127 नेपाली नागरिक, जो विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे थे, शामिल हैं।

इसके अलावा नेपाल पुलिस, नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल, सीमा शुल्क कार्यालय और आव्रजन कार्यालय के कई कर्मचारी भी लापता बताए गए हैं।

करीब 20 हजार सुरक्षाकर्मी राहत अभियान में तैनात

आपदा प्रभावित क्षेत्रों में करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। जमीनी बलों ने अब तक 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला है।

वहीं, हवाई बचाव अभियान के तहत हेलीकॉप्टरों ने अब तक 363 उड़ानें भरकर 3,081 लोगों को सुरक्षित निकाला है। इनमें 236 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

बचाव अभियान के दौरान बाढ़ से प्रभावित एक जलविद्युत सुरंग से 279 लोगों को सीधे सुरक्षित बाहर निकाला गया है। नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है। स्थानीय स्वयंसेवकों, सुरक्षा बलों और प्रशासन की टीमें मलबे में फंसे लोगों की तलाश, शवों की बरामदगी, सड़क संपर्क बहाल करने और प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने में जुटी हैं।

Updated on:
31 Aug 2026 10:56 am
Published on:
31 Aug 2026 10:55 am