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‘भारत की प्रार्थनाएं सिर्फ भारत के लिए नहीं, पूरे ब्रह्मांड के लिए हैं’, टोरंटो में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

Mohan Bhagwat Toronto Speech: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने टोरंटो में कहा कि भारत की प्रार्थनाएं पूरे ब्रह्मांड के लिए हैं। दुनिया को दिशा दिखाने के लिए हिंदुओं को अपनी सांस्कृतिक जिम्मेदारी समझनी होगी। पढ़ें पूरी खबर...
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भारत

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Pratiksha Gupta

Aug 31, 2026

Mohan Bhagwat Latest Speech, RSS Chief Mohan Bhagwat

टोरंटो में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का संबोधन (फोटो सोर्स- IANS)

Mohan Bhagwat: कनाडा के टोरंटो शहर से RSS प्रमुख मोहन भागवत का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और वैश्विक जिम्मेदारी को लेकर प्रवासी हिंदुओं को अपनी जड़ों की याद दिलाई है। मोहन भागवत ने कहा कि भारत की भूमि से जो भी प्रार्थनाएं निकली हैं, वे केवल किसी एक देश या वर्ग के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया और ब्रह्मांड के कल्याण के लिए हैं। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया को शांति और सही राह की जरूरत है, इसलिए हिंदुओं को अपनी इस सोच पर ध्यान देना होगा।

हमारे पूर्वजों ने कभी किसी पर कुछ नहीं थोपा

टोरंटो में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए RSS प्रमुख ने कहा कि भारत के पूर्वजों का इतिहास कभी भी दूसरों पर अपने विचारों को जबरदस्ती थोपने का नहीं रहा। हमारे पूर्वज दुनिया के कोने-कोने में गए, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने आचरण और संस्कारों से लोगों का दिल जीता। भारत हमेशा से वह नेतृत्व प्रदान करता आया है, जो अंदर से आता है और खुद उदाहरण पेश करके दुनिया को रास्ता दिखाता है।

जो सीखा है, अब उस पर ध्यान देने की जरूरत

मोहन भागवत ने वहां मौजूद लोगों से कहा कि मैं आपको कोई नई बात नहीं बता रहा हूं। यह वही ज्ञान है जिसे आप सदियों से सीखते और दोहराते आ रहे हैं। बस फर्क इतना है कि समय के साथ हमारा ध्यान इस ओर से थोड़ा हट गया है। उन्होंने देकर कहा कि आज की दुनिया को शांति और सही दिशा की सबसे ज्यादा जरूरत है, और यह देने की क्षमता भारतीय संस्कृति में है। इसलिए अब हिंदुओं को अपनी इस वैश्विक भूमिका पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।

हर देश में बनाना होगा एक अनुकरणीय समाज

संघ प्रमुख ने वैश्विक स्तर पर रह रहे भारतीय समुदाय से अपील की कि वे जिस भी देश में रहें, वहां एक अनुकरणीय और आदर्श समाज का निर्माण करें। जब हमारा समाज अपने मूल्यों, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा भाव से मिसाल पेश करेगा, तभी दुनिया भारत के इस सार्वभौमिक संदेश को सही तरीके से अपना सकेगी।