
अमेरिका ने ईरान के लारक द्वीप पर किया हमला / फोटो सोर्स- X(@ErKripaShankary)
Iran US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब और भी ज्यादा बढ़ गया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी वायुसेना द्वारा ईरान के रणनीतिक लारक द्वीप पर बमबारी करने के बाद, ईरान ने भी कड़ी जवाबी कार्रवाई की है। ईरान की सेना 'इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने जॉर्डन में स्थित दो अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दी हैं। बीते छह महीनों से दोनों देशों के बीच चल रही खींचतान के बाद इस हमले से पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
अमेरिकी सेना ने रविवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज स्थित लारक द्वीप पर मौजूद ईरानी सैन्य लॉन्चरों पर अचानक हमला कर दिया था। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का दावा है कि ईरानी बल इन लॉन्चरों के जरिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की गुप्त तैयारी कर रहे थे। अमेरिका ने इस गतिविधि को अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना है। इसके बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सेना ने दो सैन्य लॉन्चरों को पूरी तरह तबाह कर दिया। इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी जारी की थी कि समुद्र में जहाजों का रास्ता रोकने वाले किसी भी जहाज या देश के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
अमेरिकी हमले के कुछ ही घंटों बाद ईरान के IRGC ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने जॉर्डन में स्थित 'किंग हुसैन' और 'अल-अज्राक' अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए। ईरान का कहना है कि लारक द्वीप पर हुई अमेरिकी बमबारी में उसके कई सैन्यकर्मी और नागरिक मारे गए हैं, जिसकी जवाब में यह कार्रवाई की गई। हालांकि, जॉर्डन का कहना है कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में आती हुई 8 ईरानी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया, जिससे बड़ा नुकसान होने से बच गया।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस संघर्ष की सबसे प्रमुख वजह 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जलमार्ग बना हुआ है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग पूरी दुनिया के लिए ऊर्जा आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी इस जंग के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले व्यापारी जहाजों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
ईरान के रवैये से साफ है कि वह अमेरिकी सैन्य दबाव के आगे झुकने के मूड में नहीं है और उसने एक लंबे संघर्ष के लिए तैयार रहने का संकेत दे दिया है। दूसरी तरफ, अमेरिका ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और तेल मार्गों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाता रहेगा।
Updated on:
31 Aug 2026, 7:39 AM IST
Published on:
31 Aug 2026, 7:37 AM IST
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