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‘यह बात कहने अमेरिका जाने की क्या जरूरत?’ मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता वाले बयान पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी का सवाल

Rashid Alvi on Mohan bhagwat Statement: मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता वाले बयान पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यह बात कहने के लिए भागवत को अमेरिका जाने की जरूरत क्यों पड़ी।
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Rashid Alvi on Mohan Bhagwat Hindu-Muslim Unity Speech.

RSS प्रमुख मोहन भागवत और कांग्रेस नेता राशिद अल्वी। (Photo- IANS)

Rashid Alvi questions Mohan Bhagwat's Hindu-Muslim unity: अमेरिका में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता वाले बयान पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा कि अगर भारत में दोनों समुदायों के बीच कोई समस्या नहीं है, तो इस तरह की बात विदेश में जाकर कहने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने कहा, ‘पहला सवाल यह है कि यह बात अमेरिका जाकर कहने की जरूरत क्यों पड़ी? अगर भारत में हिंदू और मुसलमानों के बीच कोई समस्या नहीं है, तो वहां जाकर अचानक इस बारे में बोलने की जरूरत क्यों पड़ी? इसका मतलब है कि कोई समस्या जरूर है।’

RSS पर मुस्लिम विरोधी रवैया अपनाने का आरोप

राशिद अल्वी ने सवाल किया कि क्या मोहन भागवत राजनीतिक नेताओं की ओर से मुसलमानों को लेकर दिए गए बयानों से अनजान हैं। उन्होंने RSS पर मुस्लिम विरोधी रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, ‘पूरी दुनिया जानती है कि भारत में क्या हो रहा है… RSS एक मुस्लिम विरोधी संगठन है। RSS जिस तरह से मुसलमानों के खिलाफ काम करता है, हमारे लिए यही उसका असली डीएनए नजर आता है।’

कई मुस्लिम नेताओं ने दी सकारात्मक प्रतिक्रिया

राशिद अल्वी के बयान के उलट कई मुस्लिम नेताओं ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना यासूब अब्बास ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमान देश की दो आंखों की तरह हैं। अब्बास ने कहा, ‘मोहन भागवत का बयान सराहनीय है। जो हिंदू मुसलमानों के प्रति दुश्मनी रखता है, वह वास्तव में हिंदू नहीं है। हिंदू और मुसलमान देश की दो आंखें हैं और चेहरा तभी अच्छा दिखता है, जब दोनों आंखें सही-सलामत हों।’

वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि भागवत के बयान से सकारात्मक संदेश गया है, लेकिन इसे जमीन पर भी लागू किया जाना चाहिए। बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने भी भागवत के बयान का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत भाईचारे और हिंदू-मुस्लिम आपसी प्रेम की धरती है।

क्या कहा था मोहन भागवत ने?

अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा, ‘अगर कोई हिंदू सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा। अगर आप खुद को हिंदू कहना चाहते हैं, तो आपको विश्वास करना होगा कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य तक पहुंचते हैं और हर इंसान की गरिमा है। इंसानों के बीच कोई अंतर नहीं है।’

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