
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी। (फोटो : ANI )
Telangana SIR: तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (Revanth Reddy) ने चुनाव आयोग (ECI) से राज्य में वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के शेड्यूल को चार हफ्ते और बढ़ाने की मांग की है। उनके मुताबिक कई मतदाता जो थोड़े समय के लिए बाहर गए थे जैसे काम के सिलसिले में, पढ़ाई के लिए या परिवार के पास उन्हें भी ‘परमानेंटली शिफ्टेड’ यानी स्थायी रूप से स्थानांतरित की श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने कहा कि अस्थायी अनुपस्थिति और स्थायी शिफ्टिंग के बीच फर्क नहीं किया जा रहा। इससे लाखों असली मतदाताओं के नाम कटने का खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने पत्र में दावा किया कि करीब 73 लाख वोटरों की एंट्री को अनुपस्थित, दूसरी जगह जा चुके, मृत या डुप्लीकेट (ASDD) श्रेणी में रखा गया है। इसमें से करीब 45 लाख वोटरों को ‘स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके’ के रूप में दर्ज किया गया है।
मुख्यमंत्री द्वारा पत्र में दी गई जानकारी साझा करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इन आंकड़ों को चौंका देने वाला और पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। इसके साथ ही चुनाव आयुक्त से तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया। इसके अलाव तेलंगाना कांग्रेस के आधिकारिक एक्स चैनल पर भी इस मुद्दे पर ट्वीट किया गया और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से अनुरोध किया है कि वे पत्र में लिखी बातों को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।
रेड्डी ने बताया कि अब तक 2.65 करोड़ एन्यूमरेशन फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं। इनमें से 60.5 लाख फॉर्म में गड़बड़ी पाई गई है। वहीं, करीब 32 लाख फॉर्म में पुरानी मतदाता सूची से लिंक नहीं मिला। उन्होंने कहा कि ये दोनों अलग-अलग श्रेणियां हैं और कुल मिलाकर 92.86 लाख वोटरों को नोटिस का जवाब देना पड़ सकता है।
रेड्डी ने पत्र में कहा कि मौजूदा सत्यापन प्रक्रिया में कुछ कमियां हैं। जैसे किसी व्यक्ति की अस्थायी अनुपस्थिति और स्थायी रूप से दूसरी जगह बसने के बीच अंतर न कर पाना, घर बदलने वाले असली मतदाताओं को पर्याप्त मदद न मिलना और ‘शिफ्टेड’ मतदाताओं को कानूनी नोटिस प्रक्रिया से बाहर रखना। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए रेड्डी ने 16 सितंबर की मौजूदा समयसीमा के बाद दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अवधि चार हफ्ते बढ़ाने की मांग की है।
समय सीमा बढ़ाने के अलावा रेवंत रेड्डी ने चुनाव आयोग के सामने कुछ सुझाव रखे हैं। उन्होंने गांवों में ग्राम सभा और नगर निकायों के वार्डों में वार्ड कमेटी की बैठक में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को कम से कम दो बार सार्वजनिक रूप से पढ़ने का भी सुझाव दिया। वोटरों को नोटिस का जवाब देने के लिए एक हफ्ते के बजाय तीन से चार हफ्ते का समय मिलना चाहिए। साथ ही मान्य दस्तावेजों की व्यापक सूची जारी करने की मांग की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हैदराबाद, मेडचल-मलकजगिरी और रंगारेड्डी जिलों में सत्यापन का बोझ बहुत ज्यादा था। इन तीनों जिलों में कुल ASDD एंट्रीज का 58.6 फीसदी और सत्यापन नोटिस का 41.9 फीसदी हिस्सा है। इसलिए उन्होंने चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) स्तर पर अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति और सुनवाई को स्थानीय स्तर तक पहुंचाने की भी मांग की।
Updated on:
30 Aug 2026, 12:49 PM IST
Published on:
30 Aug 2026, 12:49 PM IST
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