31 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

भेड़ पाल कर पाला है- बहकर आई लाशों में इकलौते बेटे को ढूंढ रहा मजबूर पिता, 5 दिन से रो-रोकर पत्नी का हुआ बुरा हाल

Nepal Tragedy: आशीष सिर्फ 17 महीने पहले नेपाल पुलिस में शामिल हुए थे। लेकिन नेपाल त्रासदी में वह लापता हो गए। उनका परिवार रो-बिलख रहा है। पत्नी इंतजार में अब भी बैठी है। बहकर आई लाशों में उन्हें ढूढ़ा जा रहा है।
2 min read
Google source verification

भारत

image

Saurabh Mall

Aug 31, 2026

missing Nepal police officer

नेपाल त्रासदी में पुलिस पोस्ट पर तैनात 23 साल के बेटे को बहकर आई लाशों में ढूढ़ता मजबूर पिता ( इमेज सोर्स: AFP)

Missing Nepal Police Officer:नेपाल में आई विध्वंसकारी बाढ़ ने कई परिवारों से उनके अपने छीन लिए हैं। किसी का पिता लापता है। किसी का भाई नहीं मिल रहा। किसी की पत्नी अपने पति के लौटने का इंतजार कर रही है। इन्हीं परिवारों में एक परिवार कपिलवस्तु का भी है।

‘द काठमांडू पोस्ट’ के मुताबिक, 23 साल के आशीष नेपाल पुलिस में थे। वह रसुवा के मैलुंग स्थित एक पुलिस पोस्ट पर तैनात थे। बाढ़ के बाद से उनका कोई पता नहीं है। पांच दिन गुजर चुके हैं। परिवार अब भी उनके लौटने की उम्मीद लगाए बैठा है।

आशीष के पिता खेदू के लिए यह दर्द और भी बड़ा है। वह उनका इकलौता बेटा है। पिता ने भेड़ें पालकर बेटे को बड़ा किया था। आज वही पिता बहकर आई लाशों में अपने बेटे को तलाशने के लिए मजबूर है।

फोन पर हुई आखिरी बातचीत फिर अचानक कट गया संपर्क

आशीष की पत्नी प्रियंका के लिए मुसीबत एक फोन कॉल से शुरू हुई। सुबह करीब 8:30 बजे उनकी पति से बात हो रही थी। तभी अचानक फोन कट गया। प्रियंका ने दोबारा कॉल किया। लेकिन फोन नहीं लगा। कुछ देर बाद फोन अनरीचेबल हो गया। करीब आधे घंटे बाद उन्हें बाढ़ की जानकारी मिली। इसके बाद उनकी चिंता डर में बदल गई। प्रियंका कहती हैं कि पांच दिन से उन्हें आशीष के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। वह अब भी उनके लौटने का इंतजार कर रही हैं।

17 महीने पहले ही नेपाल पुलिस में हुए थे शामिल

बता दें आशीष ने सिर्फ 17 महीने पहले नेपाल पुलिस की नौकरी शुरू की थी। उन्होंने नौ महीने की ट्रेनिंग पूरी की थी। मैलुंग उनकी पहली पोस्टिंग थी। बाढ़ के बाद जब नीचे की तरफ बहकर आई लाशों को अस्पताल लाया गया, तो परिवार कपिलवस्तु के एक अस्पताल पहुंचा। उन्हें उम्मीद थी कि शायद आशीष का कोई सुराग मिल जाए।
लेकिन वहां भी निराशा हाथ लगी।

पिता खेदू की आंखों में अब भी उम्मीद है। वह कहते हैं कि आशीष उनका इकलौता बेटा है। उन्होंने उसे बहुत मुश्किलों से पाला है। अब उनकी एक ही दुआ है कि बेटा जिंदा और सुरक्षित लौट आए।

अस्पतालों के चक्कर लगा रहे परिवार वाले

सिर्फ आशीष का परिवार ही नहीं, कई लोग अपनों की तलाश में अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। हेमनाथ न्यूपाने भी तीन दिन से अस्पतालों में भटक रहे हैं। उनकी जेब में करीब 28 साल के प्रकाश देवकोटा की तस्वीर है। प्रकाश रसुवा में कस्टम एजेंट थे और बाढ़ के बाद से लापता हैं। न्यूपाने हर अस्पताल में तस्वीर दिखाते हैं। वह पुलिसकर्मियों से पूछते हैं कि क्या यह चेहरा किसी शव से मिलता है।

बता दें नेपाल और तिब्बत में इस त्रासदी से मौतों का आंकड़ा 810 तक पहुंच गया है। इनमें नेपाल के 794 और तिब्बत के 16 लोग शामिल हैं। दोनों देशों में 3,048 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हर गुजरते दिन के साथ परिवारों की बेचैनी बढ़ रही है। लेकिन उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है।