
India Nepal Flood Relief: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने जनजीवन को झकझोर कर रख दिया है। कई इलाकों में घर, सड़कें और बस्तियां तबाह हुईं, जबकि बड़ी संख्या में लोग अब भी प्रभावित और लापता हैं। इस मुश्किल दौर में भारत की राहत और सहायता नेपाल के लिए उम्मीद की किरण बनी है। बिदुर नगर पालिका के मेयर राजन श्रेष्ठ IANS X पर भारत के सहयोग की सराहना करते हुए संकेत दिया है कि अब राहत के साथ-साथ लंबे पुनर्वास और पुनर्निर्माण में भी भारतीय मदद की जरूरत होगी।
बिदुर नगर पालिका के 13 वार्डों में से 10 वार्ड बाढ़ (Nepal Flood) की चपेट में आए हैं। मेयर राजन श्रेष्ठ के मुताबिक, करीब पांच हजार लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं और 500 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी है। तबाही का पैमाना इतना बड़ा है कि मृतकों की वास्तविक संख्या का आकलन करना भी मुश्किल बताया जा रहा है। बड़ी संख्या में शव मिलने के बावजूद राहत और खोज अभियान अभी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
26 अगस्त का दिन स्थानीय लोगों के लिए भयावह याद बन गया है। अचानक आई जल आपदा ने कई परिवारों को पल भर में बेघर कर दिया। प्रशासन प्रभावितों को फिलहाल होल्डिंग सेंटरों में ठहरा रहा है, जहां उनके लिए जरूरी राहत पहुंचाने की कोशिश जारी है।
नेपाल के लिए अब सिर्फ तत्काल राहत पर्याप्त नहीं होगी। जिन परिवारों ने घर और आजीविका गंवाई है, उनके पुनर्वास के साथ बुनियादी ढांचे को फिर खड़ा करना भी जरूरी है। बिदुर नगर पालिका इसी दिशा में योजना तैयार कर रही है। स्थानीय प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रभावित लोगों को जल्द सुरक्षित और स्थायी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
मेयर श्रेष्ठ ने भारत की भूमिका को इसी व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि भूकंप के बाद जिस तरह भारत ने नेपाल की मदद की थी, उसी तरह मौजूदा प्राकृतिक आपदा में भी नई दिल्ली से राहत और वित्तीय सहयोग मिल रहा है।
श्रेष्ठ ने भारत को नेपाल का भरोसेमंद मित्र बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा सहायता केवल संकट की घड़ी में राहत पहुंचाने तक सीमित न रहे, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों को दोबारा खड़ा करने में भी सहयोग मिले।
बिदुर के साथ नुवाकोट और रसुवा जैसे इलाकों के लिए भी नेपाल दीर्घकालिक भारतीय समर्थन की अपेक्षा कर रहा है। दरअसल, ऐसी आपदाओं के बाद सड़क, आवास, सार्वजनिक सुविधाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था की बहाली में वर्षों लग सकते हैं। यही वजह है कि नेपाल के लिए भारत की मदद अब तत्काल राहत से आगे बढ़कर पुनर्वास और पुनर्निर्माण की साझेदारी का रूप ले सकती है।