
एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हानो पेवकुर ने दिया इस्तीफा (फोटो- X @MoD Estonia)
Estonia Defence Minister Hanno Pevkur: एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हानो पेवकुर ने यूक्रेन को तोपखाने के गोले सप्लाई करने से जुड़ी विवादित समझौते के चलते पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के बाद पेवकुर ने कहा कि वह इस पूरे विवाद की राजनीतिक जिम्मेदारी ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि, मंत्री जुराबें और गोला बारूद नहीं गिनता, न ही कॉन्ट्रैक्ट नेगोशिएशन करता है, लेकिन नेशनल ऑडिट की आलोचना के बाद राजनीतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया।
मंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद ये कॉन्ट्रैक्ट्स पढ़े भी नहीं थे, क्योंकि आम तौर पर रक्षा मंत्री अलग-अलग हथियार डील्स को सीधे नहीं देखते। उन्होंने कहा कि बतौर रक्षा मंत्री मेरा का काम यूक्रेन को समर्थन देने का बुनियादी फैसला लेना है। पेवकुर का यह इस्तीफा उस समय आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध पहले ही प्रथम विश्व युद्ध से भी ज्यादा लंबा खिंच चुका है। शांति या हालात सामान्य होने के कोई स्पष्ट संकेत अभी तक नहीं दिख रहे हैं।
यूरोन्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में एस्टोनिया में यूक्रेन को आर्टिलरी शेल्स यानी तोपखाने के गोले सप्लाई करने से जुड़ी विवादित डील सामने आई थी। इसमें पावेकुर का नाम भी सामने आया था। यह डील यूरोपीय संघ के 70 मिलियन यूरो के फंड का इस्तेमाल करके की गई थी। दिलचस्प बात यह है कि इसमें एक भारतीय कंपनी भी शामिल थी।
बुधवार को यह खुलासा हुआ कि एस्टोनिया ने गोलों के लिए यह पूरी रकम पहले ही अग्रिम भुगतान कर दी थी, लेकिन इस डील में शामिल भारतीय कंपनी नेको डिफेंस म्यूनिशन्स के पास पहले कभी आर्टिलरी एम्युनिशन बेचने का कोई रिकॉर्ड नहीं था।
एस्टोनियाई अखबार ईस्टी एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में एस्टोनिया ने इटली में रजिस्टर्ड कंपनी डाटासेल के साथ शेल-सप्लाई डील पर हस्ताक्षर किए थे, जिसका मालिकाना हक भारतीय कंपनी नेको डिफेंस म्यूनिशन्स के पास है। खास बात यह है कि इन दोनों में से किसी भी कंपनी ने पहले कभी गोले नहीं बनाए थे। अब एस्टोनिया इस 2024 की डील को आर्बिट्रेशन केस यानी मध्यस्थता के मामले में चुनौती दे रहा है।
Updated on:
4 Sep 2026, 11:42 AM IST
Published on:
4 Sep 2026, 11:41 AM IST
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