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नेपाल में बाढ़ में मिले लावारिस शवों का होगा अंतिम संस्कार, DNA सैंपल के बाद कब्रों में दफनाए जाएंगे

Nepal Flood DNA Samples Bodies: नेपाल में बाढ़ के बाद बरामद अज्ञात और लावारिस शवों को संक्रमण के खतरे के चलते दफनाया जाएगा। प्रशासन दफनाने से पहले DNA सैंपल, पहचान नंबर और बरामदगी की जानकारी दर्ज कर रहा है। करीब 1.5 मीटर गहरी कब्रों को जियो-टैग किया जाएगा, ताकि भविष्य में पहचान होने पर शव परिजनों को सौंपे जा सकें।
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Aug 30, 2026
Nepal flood 675 bodies recovered
नेपाल में बाढ़ ने तबाही मचाई (Photo-IANS)

Nepal Flood Unidentified Bodies Burial: नेपाल में आई बाढ़ के बाद बरामद किए गए अज्ञात और लावारिस शवों को अब दफनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि शवों के तेजी से सड़ने और संक्रमण का खतरा बढ़ने के कारण यह फैसला लिया गया है। बता दें कि बुधवार को नेपाल में अचानक आई बाढ़ में पानी और मलबे का तेज बहाव गांवों और कस्बों में घुस गया था। अब तक कम से कम 675 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा 233 शव भारत की सीमा से लगे दक्षिणी जिले चितवन से मिले हैं।

अस्पतालों में जगह नहीं

चितवन में अस्पतालों में पर्याप्त जगह और शवों को सुरक्षित रखने की सुविधाएं नहीं होने के कारण प्रशासन को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। शवों की संख्या बढ़ने के बाद उन्हें अस्थायी तौर पर एक घर में बने कूलिंग सेंटर में रखा गया था।

एक अधिकारी के मुताबिक, जब उस जगह पर भी शव रखने की क्षमता खत्म हो गई तो उन्हें दफनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि शवों के लगातार सड़ने और उनसे उठने वाली दुर्गंध के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसके बाद शनिवार को प्रशासन ने अज्ञात और लावारिस शवों को दफनाने का फैसला किया।

दफनाने से पहले लिए जा रहे DNA सैंपल

प्रशासन शवों को दफनाने से पहले उनके DNA सैंपल सुरक्षित कर रहा है। इसके साथ ही प्रत्येक शव को एक अलग पहचान या रेफरेंस नंबर दिया जा रहा है, ताकि भविष्य में उसकी पहचान होने पर शव को निकाला जा सके।

हर शव के साथ उसकी बरामदगी की जगह का रिकॉर्ड भी दर्ज किया जा रहा है। DNA का मिलान होने के बाद संबंधित परिजन उस शव को कब्र से निकलवाकर अंतिम संस्कार के लिए ले जा सकेंगे।

शनिवार दोपहर तक 100 से ज्यादा शवों की DNA प्रोफाइलिंग पूरी की जा चुकी थी और उन्हें दफनाने के लिए तैयार किया गया था।

1.5 मीटर गहरी होंगी कब्रें

अधिकारियों के मुताबिक, शवों के लिए करीब 1.5 मीटर गहरी कब्रें खोदी जा रही हैं। इन कब्रों के बीच करीब 40 सेंटीमीटर की दूरी रखी जा रही है, ताकि भविष्य में DNA मैच होने पर सिर्फ संबंधित शव को ही आसानी से बाहर निकाला जा सके।

शवों को पहचान संख्या वाले बैग में रखा जा रहा है। प्रत्येक दफन स्थल पर कंक्रीट का प्लेटफॉर्म और एक साइनबोर्ड बनाया जाएगा, जिस पर संबंधित शव का पहचान नंबर दर्ज होगा।

दफनाने की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी की जाएगी। इसके अलावा कब्रों की लोकेशन को जियो-टैग करने की भी योजना है, ताकि भविष्य में किसी शव को ढूंढने में परेशानी न हो।

लापता लोगों के परिजनों से भी लिए जाएंगे DNA सैंपल

नेपाल में अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे लोगों से देश के अलग-अलग अस्पतालों में DNA सैंपल देने को कहा जाएगा। DNA जांच के नतीजे आने के बाद नेपाल का स्वास्थ्य विभाग इन्हें बरामद शवों के DNA से मिलाएगा। पहचान होने पर संबंधित शव का पहचान नंबर पता लगाया जाएगा। इसके बाद पुलिस रिकॉर्ड की मदद से यह पता करेगी कि वह शव किस स्थान पर दफनाया गया है। पहचान की पुष्टि होने के बाद शव को कब्र से निकालकर परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

Updated on:
30 Aug 2026 09:51 am
Published on:
30 Aug 2026 09:51 am