
Nepal Flood:नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाके में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात बहुत गंभीर बने हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आकर सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्री लापता हो गए हैं। ईशा फाउंडेशन ने शनिवार को इस पूरी घटना को लेकर एक बड़ा अपडेट जारी किया है। संगठन के अनुसार, चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग पोर्ट इमिग्रेशन सेंटर के पास अब तक किसी के जीवित बचने के सकारात्मक संकेत नहीं मिले हैं।
ईशा फाउंडेशन ने बताया कि तबाही इतनी भयंकर थी कि ग्यिरोंग पोर्ट की पूरी घाटी में लगभग 45 से 50 फीट तक गाद, मिट्टी और मलबा भर गया है। स्थानीय विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ के वक्त पानी और मलबे का बहाव लगभग 150 फीट तक ऊंचा उठ गया था, जिसने इमिग्रेशन ऑफिस समेत पूरे परिसर को तबाह कर दिया। ऐसे में किसी के बचने की संभावना बहुत कम नजर आ रही है।
26 अगस्त को आई इस अचानक बाढ़ के बाद 28 अगस्त को दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो गया था, जिसके चलते खोज अभियान को बीच में ही रोकना पड़ गया था। हालांकि, अब स्थिति को देखते हुए चीनी अधिकारियों ने घटनास्थल पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन दोबारा शुरू कर दिया है।
ईशा फाउंडेशन की टीमें सीमा के दोनों ओर तैनात रहकर राहत और बचाव कार्यों में सहयोग कर रही हैं। चीन की तरफ से फाउंडेशन की टीम ग्यिरोंग से करीब 25 किलोमीटर दूर मौजूद रहकर सीधे फ्रंटलाइन बचाव दस्तों के संपर्क में है, जबकि नेपाल की तरफ प्रभावित क्षेत्र में एंट्री न मिलने के कारण समन्वय टीम काठमांडू से काम संभाल रही है। फाउंडेशन फ्रंटलाइन टीमों को फोन-सिग्नल डेटा और जरूरी जानकारियां मुहैया करा रहा है। इसके साथ ही, बचाए गए लोगों की सूचियों का अपने सदस्यों के नामों से लगातार मिलान किया जा रहा है। हालांकि अब तक जारी किसी भी लिस्ट में समूह के सदस्यों के नाम शामिल नहीं हैं।
इस भीषण आपदा ने नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लगभग 3,000 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें कई विदेशी पर्यटक और श्रद्धालु शामिल हैं। वहीं अब तक 682 शव बरामद किए जा चुके हैं। आशंका जताई जा रही है कि कुछ शव पानी के तेज बहाव में बहकर भारतीय सीमा तक भी पहुंच गए हैं। फिलहाल इलाके में आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी है और बचाव दल दोनों देशों के प्रभावित हिस्सों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।