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किम जोंग उन की चेतावनी, कहा-सुरक्षा को खतरा हुआ तो उनका देश दक्षिण कोरिया को कर सकता पूरी तरह नष्ट

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया को 'पूर्ण विनाश' की चेतावनी देते हुए परमाणु हथियारों और नई मिसाइल प्रणालियों के विस्तार की घोषणा की है। जानें क्यों किम ने सियोल से संबंध तोड़े, लेकिन अमेरिका के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखा और रूस के साथ बढ़ती नजदीकियों के क्या हैं मायने।
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Feb 26, 2026
Kim Jong Un
उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन (Photo Credit - IANS)

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी कांग्रेस के समापन अवसर पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा है कि यदि उनके देश की सुरक्षा को रत्ती भर भी खतरा हुआ, तो उनका परमाणु संपन्न राष्ट्र दक्षिण कोरिया को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर सकता है। इस दौरान उन्होंने सियोल के साथ किसी भी प्रकार के कूटनीतिक जुड़ाव या संवाद की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया, हालांकि वाशिंगटन के साथ बातचीत के विकल्प को उन्होंने भविष्य के लिए खुला रखा है।

सैन्य विस्तार और आगामी पांच वर्षों के नीतिगत लक्ष्य

कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) की रिपोर्ट के अनुसार, किम जोंग उन ने अगले पांच वर्षों के लिए देश के मुख्य नीतिगत लक्ष्यों और सैन्य विस्तार की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की है। इस रणनीतिक योजना में मुख्य रूप से पानी के नीचे से मार करने वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) का विकास शामिल है। इसके अतिरिक्त, दक्षिण कोरिया को निशाना बनाने के उद्देश्य से सामरिक परमाणु हथियारों के भंडार को बढ़ाने पर जोर दिया गया है, जिसमें आधुनिक आर्टिलरी और कम दूरी की घातक मिसाइलें शामिल हैं।

अमेरिका से शत्रुतापूर्ण नीति त्यागने की अपेक्षा

रिपोर्ट के अनुसार, किम जोंग उन ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार फिलहाल वाशिंगटन के प्रति कठोरतम रवैया अपनाए हुए है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि अमेरिका उत्तर कोरिया के खिलाफ अपनी कथित 'शत्रुतापूर्ण नीति' का त्याग कर देता है, तो दोनों देशों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में कोई बाधा नहीं होगी। उत्तर कोरिया अक्सर अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगने वाले अमेरिकी प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय दबाव को परिभाषित करने के लिए इस शब्दावली का प्रयोग करता है। यह बयान उत्तर कोरिया के उस पुराने रुख की पुष्टि करता है, जिसमें वह बिना किसी पूर्व शर्त के परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग को ठुकराता रहा है।

विदेश नीति में रूस को प्राथमिकता और रणनीतिक संतुलन

हाल के समय में किम जोंग उन ने अपनी विदेश नीति में रूस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। यूक्रेन युद्ध में मॉस्को का समर्थन करने के लिए उत्तर कोरिया ने हजारों सैनिक और भारी मात्रा में सैन्य उपकरण भेजे हैं, जिसके बदले में उसे रूस से आर्थिक सहायता और उन्नत सैन्य तकनीक मिलने की संभावना है। हालांकि, सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध समाप्त होने के बाद रूस के लिए उत्तर कोरिया की उपयोगिता कम हो सकती है। इसी दूरदर्शिता के कारण किम ने अमेरिका के साथ बातचीत का विकल्प खुला रखा है ताकि भविष्य में रणनीतिक संतुलन बनाया जा सके।

Updated on:
26 Feb 2026 08:39 am
Published on:
26 Feb 2026 08:39 am