क्या ऑफिस में मजाक करना पड़ सकता है भारी? टेक्सास में कर्मचारी को एक टिप्पणी के बाद नौकरी से निकाले जाने का मामला सोशल मीडिया में बना चर्चा का विषय।
किसी भी कर्मचारी द्वारा काम के दौरान साथियों और सीनियरों के साथ हल्का-फुल्का माहौल बनाए रखना आम बात है, लेकिन कभी-कभी हंसी-मजाक करियर के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। जी हां, कुछ ऐसा ही हैरान करने वाला मामला अमेरिका के टेक्सास से आया है, जहां एक कर्मचारी को मैनेजर से मजाक करने की कीमत नौकरी गंवाकर चुकानी पड़ी।
दरअसल, कर्मचारी मजाक-मजाक में अपने मैनेजर से कह बैठा कि उसके पास “विक्टोरियन बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली” (immune system) जैसी कमजोरी है। उसका उद्देश्य केवल माहौल को थोड़ा मजाकिया बनाना था, लेकिन मैनेजर और मालिक ने इसे गंभीरता से लिया। कंपनी की तरफ से कर्मचारी से कहा गया कि वह एक इम्यूनोलॉजिस्ट (प्रतिरक्षा विशेषज्ञ) से मेडिकल सर्टिफिकेट लाकर यह साबित करे कि उसे यह बीमारी नहीं है। इस पर कर्मचारी ने तुरंत स्पष्ट किया कि वह मजाक कर रहा था और ऐसा कुछ भी नहीं है। बावजूद इसके, अगले दिन उसे बिना किसी स्पष्ट वैध कारण बताए नौकरी से निकाल दिया गया।
एम्प्लॉयर के मुताबिक, उन्होंने टेक्सास वर्कफोर्स कमीशन (Texas Workforce Commission) के दिशा-निर्देशों के आधार पर यह कार्रवाई की, जैसा कि उनके टर्मिनेशन लेटर में बताया गया है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि क्या मजाक के गलत अर्थ निकालकर किसी को नौकरी से निकाल देना उचित है। क्या इसे ‘रॉन्गफुल टर्मिनेशन’ यानी गलत तरीके से बर्खास्तगी नहीं माना जाना चाहिए—इसको लेकर सोशल मीडिया पर लोग बंटे हुए हैं।
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने कर्मचारी के पक्ष में कहा कि मजाक को गंभीरता से लेना एम्प्लॉयर की गलती थी, जबकि अन्य का कहना है कि “एट-विल” (at-will) रोजगार वाले राज्यों में नियोक्ता किसी भी कारण से कर्मचारी को निकाल सकते हैं, बशर्ते कारण अवैध न हो। दूसरी तरफ कंपनी का तर्क है कि स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय पर झूठ बोलना न केवल भरोसे को तोड़ता है, बल्कि यह कार्यस्थल की नैतिकता के भी खिलाफ है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह घटना हर नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए एक बड़ी सीख है कि कार्यस्थल पर संवाद करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। स्वास्थ्य, सुरक्षा और व्यक्तिगत जानकारी जैसे विषयों को मजाक का हिस्सा बनाना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि इसे अनुशासनहीनता या कंपनी के प्रति बेईमानी के रूप में देखा जा सकता है।