डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बम से पूरा यूरोप हिल गया। ईयू ने आज इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। ट्रंप की टैरिफ नीति की सबसे मुखर आलोचना फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने की है, जानिए ट्रंप को क्या-क्या कहा...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO देशों पर टैरिफ बम फोड़ दिया। ग्रीनलैंड विवाद पर अमेरिका का समर्थन नहीं करने पर उन्होंने 8 यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप ने कहा कि वह इन देशों से आने वाले सामानों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाएंगे, क्योंकि वह सभी देश ग्रीनलैंड के मसले पर अमेरिकी नीतियों का विरोध कर रहे हैं। ट्रंप के इस फैसले की ब्रिटेन और फ्रांस ने जमकर आलोचना की है। ट्रंप के टैरिफ ऐलान के बाद EU ने आज इमरजेंसी बैठक भी बुलाई है।
ट्रंप ने डेनमार्क, नार्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अगर वह सभी देश अगर अमेरिका द्वारा 'ग्रीनलैंड की पूर्ण खरीद' के लिए कोई समझौता नहीं करते हैं तो आगामी जून से यह टैरिफ 10 फीसदी से बढ़कर 25 फीसदी हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह टैरिफ नीति एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। गौरतलब बात है कि ग्रीनलैंड नाटो सहयोगी डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, जिसे वह अमेरिकी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप के टैरिफ नीति का खुलकर विरोध किया है। मैक्रों ने कहा कि फ्रांस यूरोप और दुनिया के दूसरे हिस्सों में देशों की संप्रभुता और स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है। हम इसी आधार पर यूक्रेन का समर्थन करते हैं और ग्रीनलैंड का भी। उन्होंने आगे कहा कि फ्रांस को इन टैरिफ धमकियों से डराया जा सकता है और न ही दवाब में लाया जा सकता है। अगर अमेरिका ने यह कदम उठाया तो यूरोपीय देश एकजुट होकर और मिलकर जवाब देंगे। यूरोप अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।
ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर ने कहा कि ग्रीनलैंड को लेकर हमारा रुख बिल्कुल साफ है। यह डेनमार्क के किंगडम का हिस्सा है और उसका भविष्य ग्रीनलैंड के लोगों और डेनमार्क को ही तय करना है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा सहयोगी देशों पर टैरिफ लगाना पूरी तरह से गलत है।
ट्रंप के टैरिफ लगाने के ऐलान से पूरा यूरोप हिल गया है। डेनमार्क की विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि वाशिंगटन में कुछ दिन पहले ही ग्रीनलैंड को लेकर बातचीत हुई थी। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा यह कदम उठाना बेहद आश्चर्यजनक है। इधर, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के प्रमुख एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि ट्रंप के इस कदम से यूरोप और अमेरिका के रिश्ते कमजोर होंगे। यूरोप अपनी संप्रभुता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।