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अमेरिकी अस्पताल में गोलीबारी में एक की मौत, इस साल अब तक 200 लोगों की गई जान

Delaware Shooting: अमेरिका में गोलीबारी का एक और मामला सामने आया है। डेलावेयर के अस्पताल में गोलीबारी में एक व्यक्ति ने अपनी जान गंवा दी।

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Jun 17, 2026
Delaware shooting
अमेरिकी अस्पताल में गोलीबारी (File Photo)

अमेरिका (United States of America) में गोलीबारी से एक और जान चली गई है। गन वॉयलेंस (बंदूक की वजह से हिंसा) का यह मामला डेलावेयर (Delaware) राज्य के विलमिंगटन (Wilmington) शहर के अस्पताल में हुआ, जहाँ एक शख्स ने दो वर्कर्स को गोली मार दी। अस्पताल में गोलीबारी (Hospital Shooting) से हाहाकार मच गया।

एक व्यक्ति की मौत, एक घायल

इस गोलीबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई। अन्य व्यक्ति जिसे गोली मारी गई, इस घटना में घायल हो गया। घायल व्यक्ति का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

हमलावर हिरासत में

वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर घटनास्थल से फरार हो गया और पुलिस उसकी तलाश में जुट गई। सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने हमलावर को फिलाडेल्फिया (Philadelphia) में पकड़ लिया। हमलावर 23 साल का है और विलमिंगटन के अस्पताल में ही काम करता था। उसने इस वारदात को क्यों अंजाम दिया, फिलहाल इस बारे में नहीं पता चला है। पुलिस ने वजह पता लगाने के लिए पूछताछ शुरू कर दी है।

लॉकडाउन हटाया

गोलीबारी के दौरान अस्पताल में लॉकडाउन लगाना पड़ा, जिससे अन्य वर्कर्स और मरीजों की जान बचाई जा सके। हालांकि अब लॉकडाउन हटा लिया गया है।

इस साल अब तक 200 लोगों की गई जान

अमेरिका में गन वॉयलेंस (Gun Violence) का कहर खत्म ही नहीं हो रहा है। अमेरिका में गन वॉयलेंस एक गंभीर समस्या है जो काफी लंबे समय से चली आ रही है। आए दिन ही देश में गोलीबारी के मामले देखने को मिलते हैं। इस साल के आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो अब तक 200 लोग गन वॉयलेंस की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं। हालांकि गोलीबारी के मामलों में कुछ हद तक गिरावट देखने को मिली है, लेकिन फिर भी इस तरह के हमले जारी हैं, जो चिंता का विषय है। पब्लिक प्लेस हो या फिर प्राइवेट प्लेस, अमेरिका में कोई भी जगह गोलीबारी के खतरे से सुरक्षित नहीं है।

ठोस कानून का अभाव बन रहा हत्याओं की वजह

अमेरिका में गन वॉयलेंस को खत्म करने के लिए ठोस कानून का अभाव ही हत्याओं की वजह बन रहा है। अवैध बंदूकों, अपराधियों और हिंसा पर कानून बनाने की मांग उठाई जा रही है, लेकिन इतने सालों में देश की सरकार की ओर से अब तक इस विषय में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया है।