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ईरान ने समझौते से पहले किया ऐलान, होर्मुज पर बताया अपना हक; जहाजों को लेकर भी कही बात

Iran US Peace Deal: अमेरिका-ईरान शांति समझौते से पहले ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का अधिकार जताते हुए कहा कि इसका प्रबंधन हमेशा तेहरान के हाथ में रहेगा। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संभावित परमाणु समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है।

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भारत

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Ashib Khan

Jun 17, 2026

us-iran war update

19 जून को अमेरिका और ईरान समझौते पर करेंगे आधिकारिक हस्ताक्षर (Photo-IANS)

Iran Strait of Hormuz: अमेरिका और ईरान के बीच समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर हो गए है। वहीं 19 जून को दोनों देश जिनेवा में आधिकारिक हस्ताक्षर करेंगे। इसी बीच ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा अरेफ ने होर्मुज को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज ईरान का है और इसका प्रबंधन हमेशा इस्लामिक गणराज्य ईरान के नियंत्रण में रहेगा।

अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान अहम भूमिका निभाता है। अरेफ ने कहा कि होर्मुज ईरान का है और इसका प्रबंधन ईरान की जिम्मेदारी बना रहेगा।

अरेफ ने यह भी दावा किया कि यदि ईरान की ओर से सुरक्षा उपाय नहीं किए जाएं तो जहाजों को समुद्री बारूदी सुरंगों और खतरों का सामना करना पड़ सकता है।

बता दें कि ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान इस सप्ताह जिनेवा में औपचारिक रूप से शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के करीब पहुंच चुके हैं।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने क्या कहा? 

इस बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने समझौते को लेकर अमेरिका का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता सुनिश्चित करेगा कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। साथ ही, यदि तेहरान अपने व्यवहार में बदलाव दिखाता है तो दोनों देशों के संबंधों में नया अध्याय शुरू हो सकता है।

रिपोर्टों को किया खारिज

वहीं फॉक्स न्यूज से बातचीत में वेंस ने उन रिपोर्टों को खारिज किया जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिका इस समझौते के तहत ईरान को अरबों डॉलर दे रहा है। उन्होंने कहा कि 24 अरब डॉलर ईरान को दिए जाने की खबर पूरी तरह गलत और मनगढ़ंत है। 

वेंस ने बताया कि ईरान ने अपने संवर्धित परमाणु सामग्री के भंडार को समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि समझौते से मिलने वाले किसी भी लाभ के लिए ईरान को यूरेनियम संवर्धन रोकना होगा और सख्त सत्यापन प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि प्रस्तावित समझौता 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) से काफी अलग है। उनके मुताबिक, नए समझौते में किसी भी रियायत से पहले ईरान की प्रतिबद्धताओं का सत्यापन किया जाएगा।

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संभावित शांति समझौते को बहुत शक्तिशाली दस्तावेज बताया है। समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद इसे पूरी तरह से सार्वजनिक किया जाएगा। अभी तक दोनों देशों के बीच किन बिंदुओं पर सहमति बनी है, यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है।