आईआईटी के पूर्व छात्र और वर्तमान में अमेरिका की यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर ने एक ऐसा रोबोट तैयार किया है जो लुढ़कने और कूदने के साथ ही उड़ेगा और तैरेगा भी।
बिना पैरों, पंखों या जटिल मोटरों के एक साधारण-सा दिखने वाला रोबोट कभी जमीन पर लुढ़कता है, कभी हवा में उछलता है और कभी मछली की तरह पानी में तैरने लगता है। इतना ही नहीं, वो उड़ता भी है। यह कोई जादू का खेल नहीं, बल्कि आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र और अमेरिका की क्लेमसन यूनिवर्सिटी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर फणीन्द्र तल्लाप्रगडा और उनकी टीम की वैज्ञानिक कामयाबी है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे बहुरूपी रोबोट भविष्य में मंगल या बृहस्पति के बर्फीले चंद्रमाओं पर जीवन की तलाश में अहम भूमिका निभा सकते हैं, जहाँ एक ही मशीन का चलना, कूदना, तैरना और उड़ना ज़रूरी होगा। 'स्पिनिंग मास' सिद्धांत का उपयोग करके टीम ने तीन अलग-अलग तरह के रोबोट विकसित किए हैं।
इस रोबोट के चलने का राज इसके अंदर छिपा एक 'असंतुलित घूमता हुआ द्रव्यमान' है। जैसे वॉशिंग मशीन में गीले कपड़े एक तरफ जमा हो जाते हैं, तो पूरी मशीन जोर-जोर से हिलने या 'कूदने' लगती है। इस रोबोट के अंदर एक वजन को इतनी तेजी से घुमाया जाता है कि वह रोबोट के शरीर को धक्का देने, उठाने या मोड़ने के लिए पर्याप्त बल पैदा होता है।
'स्पिन गायरो' नामक फियानुमा रोबोट असमान रास्तों पर चलते समय अचानक ऊंची छलांग लगा सकता है। यह स्प्रिंग के बजाय रोटेशन की ताकत से उछलता है। रोबोटिक फिश नमक रोबोट अपने अंदर घूमते वजन की ऊर्जा को पूंछ में ट्रांसफर करता है, जिससे ऊर्जा की बचत करते हुए यह पानी में बिना प्रोपेलर तैर सकता है। पाइप क्रॉलर नामक रोबोट गैस लाइन जैसे संकीर्ण पाइपों में रेंग सकता है। कंपन की मदद से इसके शरीर पर लगे छोटे बाल या ब्रिस्ट्ल्स इसे आगे धकेलते हैं।