
Shehbaz Sharif UNGA Speech:पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत के खिलाफ एक बार फिर सिंधु जल संधि और कश्मीर का मुद्दा उठाया। भाषण में उन्होंने पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने या उसका रास्ता बदलने की किसी भी कोशिश को युद्ध की कार्रवाई मानने की बात कही। मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष का जिक्र भी आया। पाकिस्तान की कथित जीत का दावा करते समय भारतीय राजनयिक आर. श्रीनिवास हंसते हुए नजर आए।
शहबाज शरीफ ने कहा कि सिंधु नदी पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा है। पानी को हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसे मोड़ने की कोशिश हुई तो इसे युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा।पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, भारत की ओर से संधि को स्थगित रखने का कोई कानूनी आधार नहीं है। पाकिस्तान लंबे समय से इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है।
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। भारत का कहना है कि पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय और स्थायी कदम उठाने होंगे।
शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कश्मीर विवाद के न्यायपूर्ण और निष्पक्ष समाधान की बात कही। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के तहत जनमत संग्रह की मांग दोहराई। पाकिस्तान की तरफ से कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप भी लगाए गए। शहबाज ने कहा कि उनका देश कश्मीर के लोगों को राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन देता रहेगा।
कश्मीर का मुद्दा पाकिस्तान की ओर से संयुक्त राष्ट्र में पहले भी उठाया जाता रहा है। भारत इन दावों को खारिज करता रहा है और जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा बताता है।
भाषण के दौरान मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष का भी जिक्र हुआ। शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान को इस संघर्ष में सफल बताया। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कथित हस्तक्षेप की तारीफ की। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के मुताबिक, ट्रंप की समय पर की गई पहल से दोनों देशों के बीच बड़ा युद्ध टल गया। उन्होंने इसे क्षेत्र में शांति बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
हालांकि, भारत का रुख इससे अलग रहा है। भारत ने कहा है कि मई 2025 में संघर्षविराम दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य संवाद के बाद हुआ था। नई दिल्ली ने किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावे को स्वीकार नहीं किया।
शहबाज शरीफ जब पाकिस्तान की कथित जीत का जिक्र कर रहे थे, उसी दौरान भारतीय राजनयिक आर. श्रीनिवास हंसते हुए दिखाई दिए। यह दृश्य संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान सामने आया। शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में भारत पर कई आरोप लगाए और सिंधु जल संधि के साथ कश्मीर का मुद्दा भी जोड़ा। दूसरी ओर, भारत अपने पुराने रुख पर कायम है। नई दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर उसका रुख स्पष्ट है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि महासभा ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि की ओर से कुछ बेहद अजीब बातें सुनीं। गहलोत ने पाकिस्तान के आतंकवाद के इतिहास और वहां की राजनीतिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
पेटल गहलोत ने 9/11 आतंकी हमले की 25वीं बरसी का जिक्र करते हुए कहा कि इस घटना के संदर्भ को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमले का मुख्य साजिशकर्ता ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सबसे प्रमुख सैन्य अकादमी के ठीक दरवाजे पर रह रहा था। गहलोत ने कहा कि आज पाकिस्तान का प्रतिनिधि जिस व्यवस्था के सामने निष्ठा दिखा रहा है उसका इतिहास दुनिया से छिपा नहीं है।
भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान की मौजूदा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोग ही इसे ‘फॉर्म 47 सरकार’ कहते हैं। गहलोत ने लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर पाकिस्तान की ओर से दिए गए भाषण को पाखंडी बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की राजधानी इस समय अपने ही लोगों से बचने के लिए किले में तब्दील की जा रही है। गहलोत के मुताबिक, इसकी वजह यह है कि पाकिस्तान में असली सत्ता सेना के हाथों में है। उन्होंने कहा कि नेता आते-जाते रहेंगे, लेकिन असली हुकूमत कौन चलाता है इस पर किसी को भ्रम नहीं होना चाहिए।
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान पर कट्टरता और नफरत का लंबा इतिहास रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दिन में सुरक्षा की बात करता है, जबकि रात में आतंकवाद फैलाता है। धार्मिक असहिष्णुता पर पाकिस्तान की टिप्पणियों का जवाब देते हुए गहलोत ने वहां के ईशनिंदा कानूनों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दुनिया पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले व्यवहार से परिचित है। उनके मुताबिक, दिखावटी बातें दुनिया को गुमराह नहीं कर सकतीं।
कश्मीर के मुद्दे पर पेटल गहलोत ने साफ कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर कश्मीर पर चर्चा करनी ही है तो ध्यान पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर पर होना चाहिए।
गहलोत ने रावलकोट के लोगों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां के लोग लंबे समय से अंधाधुंध हत्याओं, क्रूर हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने का सामना कर रहे हैं। उन्होंने पाकिस्तान की ओर से कश्मीर पर उठाए गए सवालों के जवाब में उसके कब्जे वाले क्षेत्र की स्थिति को सामने रखने की बात कही।