विदेश

Pakistan: सरकार ने आटा मिलों को जारी परमिट अचानक रद्द क्यों किए, रावलपिंडी और इस्लामाबाद में आटे के लाले पड़े

Pakistan Flour Crisis: पाकिस्तान की आटा मिलिंग इंडस्ट्री और पंजाब फ़ूड डिपार्टमेंट के बीच विवाद के कारण, आटा मिलों के खरीद लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। इससे मिलों के लिए उन ज़िलों से गेहूं खरीदना मुश्किल हो गया है जहां गेहूं का उत्पादन जरूरत से अधिक होता है। नतीजतन रावलपिंडी और इस्लामाबाद में लोगों को आटे के लाले पड़ गए हैं।
2 min read
Jul 12, 2026
Pakistan Flour Crisis News.
पाकिस्तान के रावलपिंडी और इस्लामाबाद में आटे की कमी। (सांकेतिक फोटो: ANI. )

Pakistan Punjab Governments Permit Crackdown Sparks Flour Crisis: पाकिस्तान की आटा मिलिंग इंडस्ट्री और पंजाब फूड डिपार्टमेंट के बीच विवाद के कारण रावलपिंडी और इस्लामाबाद में आटे की कमी हो गई है। खबरों के मुताबिक, अधिकारियों ने रावलपिंडी डिविजन में आटा मिलों को जारी किए गए गेहूं खरीदने के परमिट रद्द कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान फ्लोर मिल्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर 24 घंटे के अंदर परमिट बहाल नहीं किए गए, तो आटा मिलें उत्पादन रोक देंगी और आटे की सप्लाई बंद कर देंगी।

दोनों शहरों के लाखों निवासियों को आटे की नियमित सप्लाई पर असर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीएफएमए ने कहा कि है कि खरीद परमिट रद्द होने से आटा मिलों के लिए पंजाब के उन जिलों से गेहूं खरीदना मुश्किल हो गया है जहां गेहूं का उत्पादन जरूरत से अधिक होता है। चूँकि रावलपिंडी डिविजन और इस्लामाबाद में स्थानीय स्तर पर गेहूं का उत्पादन कम होता है, इसलिए एसोसिएशन का कहना है कि इस कदम से दोनों शहरों के लाखों निवासियों को आटे की नियमित सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

मीटिंग में शामिल लोगों ने फूड डिपार्टमेंट के फैसले की कड़ी आलोचना की

पीएपफएमए के पंजाब चैप्टर और रावलपिंडी डिविजन की इस मुद्दे पर हुई एक इमरजेंसी मीटिंग में समस्या पर ​चर्चा की गई, जिसकी अध्यक्षता पंजाब के चेयरमैन रियाजउल्लाह खान ने की। मीटिंग में शामिल लोगों ने फूड डिपार्टमेंट के फैसले की कड़ी आलोचना की और इसे आटा मिल मालिकों के हालिया विरोध-प्रदर्शनों से जोड़ा। इन विरोध-प्रदर्शनों का मकसद इंडस्ट्री के सदस्यों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और एफआईआर के अन्यायपूर्ण स्वरूप को उजागर करना था।

इस कदम से गेहूं की सप्लाई चेन बाधित हुई

पीएफएमए नेताओं का आरोप है कि उन विरोध प्रदर्शनों के तुरंत बाद, विभाग ने वे परमिट रद्द कर दिए जिनसे मिलों को रावलपिंडी डिविजन के अंदर गेहूं ले जाने की कानूनी इजाजत थी। उन्होंने दावा किया कि इस कदम से गेहूं की सप्लाई चेन बाधित हुई है और आटे के उत्पादन पर संकट आ गया है।

पूरे डिविजन में आटा मिलों को अपना कामकाज रोकना पड़ सकता है

पीएफएमए के पूर्व वाइस प्रेसीडेंट रजा अहमद शाह और एसोसिएशन के दूसरे प्रतिनिधियों ने इस फैसले को खारिज कर दिया और परमिट तुरंत बहाल करने की मांग की। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह आदेश वापस नहीं लिया गया, तो पूरे डिविजन में आटा मिलों को अपना कामकाज रोकना पड़ सकता है, जिससे स्थानीय बाजारों में आटे की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। ध्यान रहे कि इनमें इस्लामाबाद को आटा सप्लाई करने वाली कई मिलें भी शामिल हैं।

गैर-जरूरी पाबंदियों से ग्राहकों पर बेवजह बोझ पड़ रहा

एसोसिएशन ने पंजाब खाद्य विभाग पर ऐसी नीतियां अपनाने का आरोप भी लगाया है जिनसे मिल मालिकों की मुश्किलें बढ़ती हैं और गेहूं व आटे की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएफएमए के प्रतिनिधियों का कहना है कि गेहूं के ट्रांसपोर्ट पर लगाई गई गैर-जरूरी पाबंदियों से ग्राहकों पर बेवजह बोझ पड़ रहा है। ( इनपुट : ANI.)