
Pakistan Defend Saudi Arabia Houthis Khawaja Asif: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच पाकिस्तान ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब को सैन्य मदद देने का खुला संकेत दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मंगलवार को कहा कि सऊदी अरब की सुरक्षा और रक्षा के लिए पाकिस्तान अपने सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करेगा।
इटली की राजधानी रोम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आसिफ ने कहा कि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए हालिया रक्षा समझौते के तहत इस्लामाबाद सऊदी अरब की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि पाकिस्तानी सेना या वायुसेना पहले ही यमन में हुए हवाई हमलों में शामिल हुई है या नहीं।
आसिफ से पूछा गया था कि क्या पाकिस्तान ने यमन में ईरान से जुड़े ठिकानों पर हुए हवाई हमलों में हिस्सा लिया है। उन्होंने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की रक्षा के लिए पाकिस्तान के पास जो भी सैन्य साधन हैं वे सऊदी अरब के लिए भी उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सऊदी अरब की रक्षा के लिए हुए समझौते से बंधा हुआ है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान से सैन्य मदद मांगी है या नहीं।
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने 7 अगस्त 2026 को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर हमला होने की स्थिति में उसे सभी पर हमला माना जाएगा। तीनों देशों ने इस समझौते को रक्षात्मक बताया है। उन्होंने कहा है कि यह किसी खास देश के खिलाफ नहीं है। इस समझौते के तहत तीनों देश अपनी सुरक्षा व्यवस्था के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
आसिफ ने बताया कि गठबंधन की व्यवस्था तैयार करने के लिए एक सचिवालय बनाया जा रहा है। कुछ अन्य देशों ने भी इसमें शामिल होने में रुचि दिखाई है। हालांकि, फिलहाल गठबंधन का विस्तार करने की कोई योजना नहीं है।
आसिफ ने कहा कि हूती विद्रोहियों ने हाल के दिनों में सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज किए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि हूतियों ने यमन के लाल सागर तट पर अपना नियंत्रण बढ़ाया है।
उनके मुताबिक, हूतियों ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा और लाल सागर के कुछ द्वीपों पर भी कब्जा कर लिया है। इससे उनकी पहुंच बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य तक बढ़ गई है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है।
सऊदी अरब को सैन्य मदद देने की बात कहने के साथ ही आसिफ ने बातचीत के रास्ते का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र में चल रहे व्यापक संघर्ष को बातचीत के जरिए खत्म करने के पक्ष में है।
पाकिस्तान के ईरान के साथ भी संबंध हैं। आसिफ ने कहा कि ईरान से जुड़े कुछ संगठन अब अपने फैसले खुद लेने लगे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रखेगा।
इससे पहले पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की थी। अप्रैल में इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच सीधे बातचीत भी हुई थी। बाद में दोनों पक्षों के बीच एक अस्थायी समझौता हुआ, लेकिन तय समय में अंतिम समझौता नहीं हो सका।