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पाकिस्तान में पानी के संकट ने उठाया घरेलू प्रबंधन की नाकामी से पर्दा

Pakistan Water Crisis: पाकिस्तान में पानी का संकट गहराता जा रहा है! हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने पाकिस्तान के घरेलू प्रबंधन की नाकामी को सबके सामने ला दिया है!
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Sep 26, 2026
Pakistan water crisis
पाकिस्तान में पानी का संकट (Photo - ANI)

पाकिस्तान (Pakistan) की खेती-बाड़ी पर आधारित अर्थव्यवस्था और सिंचाई व्यवस्था काफी हद तक सिंधु नदी पर निर्भर है, लेकिन क्षेत्र में जल संकट गहराता जा रहा है, जो देश के घरेलू प्रबंधन की नाकामी से पर्दा उठाता है। ब्रिटिश मीडिया आउटलेट 'मिली क्रॉनिकल' के संस्थापक और संपादक ज़हाक तनवीर ने 'द टाइम्स ऑफ इज़रायल' में एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें इस बात का ज़िक्र किया गया है!

सिंध प्रांत में सबसे ज़्यादा दिक्कत

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने लंबे समय से चली आ रही सिंधु जल संधि को खत्म कर दिया! इससे पाकिस्तान में पानी का संकट पैदा हो गया! विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार पूरे पाकिस्तान में भूजल में कमी, जल-जमाव, खारापन और प्रदूषण जैसी समस्याएं देखी गई हैं और सिंध प्रांत में इसकी वजह से सबसे ज़्यादा दिक्कत हो रही है!

पाकिस्तान का नाकाम घरेलू प्रबंधन

तनवीर की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में पानी की असल समस्याएं भारत के किसी बांध की वजह से पैदा नहीं हुई हैं। ये पाकिस्तान की अपनी जल व्यवस्था की कमियों और देश के नाकाम घरेलू प्रबंधन की वजह से हुआ है! पाकिस्तान के अंदरूनी जल प्रबंधन की हर नाकामी के लिए भारत को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

भारत को करना चाहिए आधुनिक जल बुनियादी ढांचे में निवेश

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को सिंधु जल संधि के तहत तकनीकी और कानूनी रूप से जहाँ भी संभव हो, अपनी जायज़ जल और ऊर्जा क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना चाहिए और पनबिजली, भंडारण और आधुनिक जल बुनियादी ढांचे में निवेश करना चाहिए। इसमें यह भी कहा गया है कि दशकों की कूटनीतिक सावधानी को स्थायी विकासात्मक नुकसान में नहीं बदलने देना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार इससे मिलने वाला बड़ा सबक यह है कि दोनों देशों के बीच लंबे समय पहले हुआ समझौता 1960 की स्थिति पर ही टिका नहीं रह सकता, जबकि उससे जुड़ी रणनीतिक, आबादी से जुड़ी और पर्यावरण संबंधी स्थितियाँ लगातार बदल रही हैं।

भारत के हित जायज़ राष्ट्रीय-हित

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगला अध्याय सिर्फ इसलिए किसी पुरानी व्यवस्था को बनाए रखने के बारे में नहीं होना चाहिए सिर्फ इसलिए कि वो लंबे समय से चली आ रही है। बल्कि यह एक ऐसा आधुनिक ढांचा बनाने के बारे में होना चाहिए जो भारत की विकास की जायज़ ज़रूरतों के साथ-साथ पाकिस्तान के निचले इलाकों से जुड़े हितों और दोनों तरफ़ के समुदायों के अधिकारों को भी मान्यता दे। भारत को अपनी नदियों के विकास के लिए माफ़ी मांगने की ज़रूरत नहीं है। उसके पानी, ऊर्जा और विकास से जुड़े हित जायज़ राष्ट्रीय-हित हैं, न कि ऐसी रियायतें जिनके लिए पाकिस्तान की मंज़ूरी की ज़रूरत हो।

Updated on:
26 Sept 2026 08:55 pm
Published on:
26 Sept 2026 08:55 pm