यूएई से पाकिस्तानी शिया मुस्लिमों को रातों-रात डिपोर्ट किया जा रहा है। क्या है पूरा मामला? आइए नज़र डालते हैं।
संयुक्त अरब अमीरात - यूएई (United Arab Emirates - UAE) से बड़ी तादाद में पाकिस्तानी शिया मुस्लिमों (Shia Muslims) को डिपोर्ट किया जा रहा है। इससे पाकिस्तान (Pakistan) के शिया समुदाय में चिंता बढ़ा दी है। कई वर्षों से यूएई में काम कर रहे कई लोग अचानक नौकरी, निजी सामान और अपनी बचत तक गंवाकर पाकिस्तान लौटने पर मजबूर हो गए हैं। ईरान युद्ध के बीच हुई इस कार्रवाई को लेकर अब ह्यूमन राइट्स वॉच (Human Rights Watch) ने भी गंभीर चिंता जताई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 28 फरवरी को ईरान-अमेरिका इज़रायल (Iran-US Israel War) युद्ध शुरू होने के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में हालात काफी गंभीर हो गए। इस दौरान अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमले किए गए थे। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने मिडिल ईस्ट में यूएई समेत कई देशों पर ड्रोन्स और मिसाइलों से हमले किए थे। पाकिस्तानी शिया नेताओं का कहना है कि इसी वजह से यूएई में रह रहे पाकिस्तानी शिया मुस्लिमों को डिपोर्ट करने की कार्रवाई तेज़ कर दी गई, क्योंकि यूएई में सुन्नी मुस्लिमों की आबादी ज़्यादा है और ईरान में शिया मुस्लिमों की और पाकिस्तानी शिया मुस्लिम भी ईरानी शिया मुस्लिमों का समर्थन करते हैं।
कुछ आंकड़ों के अनुसार 28 फरवरी के बाद से अब तक करीब 7,500 पाकिस्तानी शिया मुस्लिमों को यूएई से डिपोर्ट जा चुका है। हालांकि वास्तविक संख्या इससे भी ज़्यादा हो सकती है। पाकिस्तान के शिया बहुल कुर्रम जिले के एक सामुदायिक प्रतिनिधि ने दावा किया कि युद्ध शुरू होने के बाद सिर्फ उनके इलाके से ही लगभग 1,500 लोग यूएई से वापस पाकिस्तान भेजे गए हैं।
यूएई से डिपोर्ट होकर पाकिस्तान लौटे कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए हैं। लोगों ने बताया कि उन्हें अपना सामान लेने या बैंक खातों से पैसे निकालने तक का समय नहीं दिया गया। एक व्यक्ति ने बताया कि अधिकारियों ने उससे उसकी तनख्वाह और पाकिस्तान भेजे जाने वाले पैसों के बारे में पूछताछ की। इसके बाद उससे सवाल किया गया, “क्या तुम ईरान को भी पैसे मदद भेजते हो?” एक अन्य व्यक्ति जो 16 वर्षों तक दुबई मेट्रो में मैनेजर के तौर पर काम कर चुका था, ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसका फोन जब्त कर लिया, हथकड़ी लगाई और 9 दिन तक हिरासत में रखा। बाद में उसे भीड़भरी अंधेरी बस में एयरपोर्ट ले जाकर पाकिस्तान डिपोर्ट कर दिया गया।